माला संस्कार करने की विधि / Mala Sanskar Ki Vidhi

माला संस्कार की विधि प्राण प्रतिष्ठा करने की विधि 

प्राण प्रतिष्ठा हमारे जीवन मे धर्म का महत्व है 
और धर्म मे अपने अपने धर्मो के हिसाब से देवी देवता है 
जिनकी पूजा की जाती है पूजा के लिये मूर्ति माला यंत्रो आदि की जरूरत होती है और इन सबको मूर्ति माला यंत्रो मे प्राण प्रतिष्ठा की जाती है 
 इस दुनिया मे सारी चीजे बेजान ,निर्जीव और मृत है 
यहॉ तक की हमारा शरीर भी मृत है लेकिन ये कार्य कर रहा है क्योकि इसमें प्राण ऊर्जा है जो चैतन्य ऊर्जा है 
केवल यही जाग्रत ,चैतन्य और जीवित है बाकी सब इसके कारण ही जिन्दा है चैतन है 
इसे हम प्राण ऊर्जा ,चैतन्य ऊर्जा ,चित शक्ति आदि नामो से जानते है जब हम प्राण प्रतिष्ठा करते है तो इसी ऊर्जा को हम उस वस्तु मे ट्रान्सफर करते है या डालते है और वो वस्तु मे चेतना आती है 
ये हमारे प्राण ऊर्जा के कारन होता है और वो वस्तु चैतन कहलाती है मूर्ति मे भी यही प्राण प्रतिष्ठा की जाती है और उसके पूजन पाठ से हमारी मनोकामना शीघ्र पूरी होती है 
यदि येसी प्राण प्रतिष्ठित माला से जाप किया जाता है तो फल कई गुना बढ जाता है 
येसे ही यंत्रो को यदि प्राण प्रतिष्ठित कर लिया जाता है तो उनका प्रभाव भी बहुत बढ जाता है 
 प्राण प्रतिष्ठित करने की विधि दे रहा हू इसके द्वारा आप किसी भी माला यंत्र मूर्ति आदि को चैतन्य कर सकते है यंत्र को , या माला को , या मूर्ति को जिसकी प्रतिष्ठा करनी हो उसे 
 पहले दूध गंगाजल सादे पानी से अच्छी तरह धो लेना चाहिये 
आप चाहे तो पंचगव्य से भी धो सकते है 
 उसके बाद उसे पोछकर साफ करके माला को दोनो हाथो मे पकडे , यंत्र कर रहे है तो यंत्र के मध्य भाग पर अगूंठा रखे और 
मूर्ती कर रहे है तो मूर्ति के सीने पर अपने दाये हाथ के अगूठे से टच करे और निम्न मंत्र का जाप करें मंत्र 
ॐ सुहंसाय विद्यमये प्राण प्राणाय धीमहि।
 तन्नो ज्योति निरंजनि प्रचोदयात ।।
 ज्योति निरंजनि के स्थान पर उस देवता का नाम लेना है 
जिसकी स्थापना कर रहे है 
 जैसे *ॐ सुहंसाय विद्यमये प्राण प्राणाये धीमहि तन्नो शिव प्रचोदयात* 
 जितना अधिक चैतन्य करना हो उतने मंत्र का जाप करते रहिये इसमे कोई संख्या निश्चित नही है आप 108 , 1008 , 10008 जितना चाहे उतना जाप कर सकते है 
पूरे जाप मे अगूठा वही टच रहेगा और भावना करनी है कि हमारे शरीर की प्राण ऊर्जा इस अगूठे द्वारा इस मे प्रवेश कर रही है 

तंत्र भाव प्रधान है ये याद रखे
श्रदा विश्वास से ही ये फलता फूलता है 
हमारे शास्त्रो मे भी इसके मंत्र दे रखे है आप उसके द्वारा भी प्राण प्रतिष्ठा कर सकते है 
 मंत्र 
ॐ मनोजुस्तिजुस्तमयजस्य बृहस्पति यज्ञ समिमं दधातु विस्वे देवा इहा माद्यंत्यामो प्रतिस्ठितः
 अस्यै प्राणः प्रतिष्ठन्तु अस्यै प्राणाक्षरन्तु च
अस्यै वैषत्वमर्चायै मामहेति च कश्चन 
इसी प्रकार मंत्र जाप कै समय मंत्र में ध्यान देकर मंत्र मे भी प्राण ऊर्जा डाली जाये तो मंत्र भी चैतन्य हो जाता है* 
 इस प्रकार से चैतन्य माला द्वारा जाप करने से चैतन्य मूर्ति का , चैतन्य यंत्र का पूजन करने पर चमत्कार बहुत जल्द होते है 
और मंत्र जल्दी फलित होता है ये मंत्र , मूर्ति , यंत्र , माला को प्राण प्रतिष्ठित करने की विधि दी गयी है 
ठीक से पढें और समझें और एक तात्रिक विधि भी होती है 
जिसमे गौ मूत्र से , रक्त से माला को संस्कार किया जाता है* 
जन सामान्य को वो विधि देना उचित नही है 
किसी भाई को यदि माला संस्कार गौ मूत्र से करवाना हो तो पर्सनल सम्पर्क करें आपको माला संस्कारित करके दे दी जायेगी गो मूत्र से संस्कार करने की दक्षिणा 1100/ 
रक्त से संस्कार करने की दक्षिणा 2100/ जिस किसी भाई को करवाना हो पर्सनल बता दें 

 हरेश तंत्र शक्ति साधना केन्द्र








मेरा अनुभव / Mera Anubhav

हरेश तंत्र शक्ति साधना केन्द्र

मेरा अनुभव 
एक दिन मै अपने गुरूदेव जी के शरण मे था 
और तंत्र पर चर्चा हो रही थी तो मेरे गुरूदेव ने मुझसे कहा कि हरीश भगवान बारह मिनट में आ सकते है
 तो मै चौंक गया बडा खुश होकर मेने पूछा केसे तो उन्होने कहा 
ये सीखने में बारह साल लग जाते है और 
उस दिन में तंत्र के बहुत बडे राज को समझ चुका था 
क्या आप समझे ? 
सच मैं भगवान तो बारह ही मिनट में आ जाते है 
 मगर हमें उने बुलाने में बारह साल लग जाती है 
 शक्तियॉ तो मिनटों में हाजिर हो जाये मगर हम अपनी योग्यता साबित ही नही कर पाते 
और कभी तंत्र को , कभी गुरू को , कभी शक्तियों को कोसने लगते हैं 
जबकि असली कमी हमारे अपने अन्दर होती है 
हम ना तो तंत्र सीखना चाहते है 
 ना तंत्र समझना चाहते है हम सीधा करना शुरू कर देते है 
नतीजा हमे कुछ नही मिलता हम लोग तंत्र में शरीर से काम लेते है जबकि तंत्र में सफलता मन से काम लेने में मिलती है
माला फेरत जग मुआ मिटा का मन का फेर । 
कर का मनका डाल दें मन का मनका फेर ।। 

तंत्र मे सफलता असफलता का सारा राज इनी चार लाइनों में छुपा है 
 हरेश तंत्र शक्ति साधना केन्द्र
















जाप के प्रकार और साधना के परहेज / Jaap Ke Prkar Or Sadhna ke Parhej

हरेश तंत्र शक्ति साधना केन्द्र 

जाप के प्रकार और साधना के परहेज क्या है

 जाप तीन प्रकार का होता है 
1. मानसिक - जो केवल मन मे होता है जीभ भी स्थिर हो जाये 

2. उपांशु-  जो कि आपके अलावा कोई न सुन सके न समझ सके बुदबुदाना

3.बाचिक - जोर जोर से बोलना जिसे दूर बैठा सुन सके कथा वाचक की तरह 

केवल गुरुमंत्र आंखे बंद करके मानसिक होगा
बाकी सभी मंत्र जाप खुली आँखों से उपाशुं करने हैं 
लाइट बन्द रहेगी दीपक का प्रकाश पर्याप्त है 
ये नियम केवल साधना और कवच सिद्ध के समय रखने है गुरुमंत्र या नित्य पंचोपचार पूजन में नही 

साधना करते समय आपको ये चार नियमों का पालन करना है 

1* ब्रह्मचर्य का पालन करना है स्वप्नदोष से कोई दिक्कत नही है 
2* शराब या भांग या कोई भी ऐसा नशा जो आपके दिमाग को कंट्रोल करें व नहीं करना हैं 
3* अंडा ,मांस, मछली का प्रयोग नही करना है 
4* पूरे साधना काल मे उसी कमरे में जमीन पर बिस्तर लगाकर सोना हैं 

 *ये कुछ जरूरी वस्तुएं हैं जो प्रत्येक साधक के पास होनी आवश्यक हैं* 
 रुद्राक्ष माला, सफेटिक माला, काली हकीक माला, हरि तस्वी माला, 
गौ मुखी, आसन लाल , आसन के कपड़े, काले ,पिले, सफेद, हरे,  रोली ,कलावा, सुगंधित इत्र, अगरबत्ती या धूपबत्ती भोग में बतासे, मिश्री, या जो हो साधना में मिठाई

साधना की तैयारी केसे करें / Sadhna ki Tayari Kese Karen

हरेश तंत्र शक्ति साधना केन्द्र

*साधना की तैयारी*


बहुत से साधक येसे है जो साधनाये  तो करते है मगर सफल नही होते उनकी सबसे मैन कमी ये होती कि वो लोग साधना को बिना तैयारी के करते है नतीजा ये होता है कि साधना असफल हो जाती है और वो लोग अपनी कमी देखने के बजाय तंत्र को दोष देने लग जाते है
आज मै आपको साधना की तैयारी के बारे मे कुछ जानकारी दे रहा हू ध्यान से पढें और करें आपको सफलता अवश्य मिलेगी

१. सबसे पहले योग्य गुरू से साधना का विधि विधान प्राप्त करें
२. *साधना कम से कम साधना वाले दिन से दस बारह दिन पहले लेनी चाहिये ताकि तैयारी कर* सकें
३. मंत्र को अच्छी तरह ये याद कर लेना चाहिये अटक अटक कर जाप किया मंत्र निष्फल हो जाता है
४. पूरी सामग्री ताजा, शुद्ध , और पूरी मात्रा मे खरीद कर रख लेनी चाहिये ताकि बीच में दिक्कत ना हो
५.  फल , फूल , मिठाई , दूध , दही वगैरह उसी दिन ताजी खरीद कर लाना चाहिये
६. तन , मन , धन से तैयारी करनी चाहिये साधना पूरे मन से , पूरे विश्वास से , पूरी श्रदा  के साथ करनी चाहिये बिना इनके साधना कभी सफल नही होती
७. *तंत्र को ,  मंत्र को , गुरू को  , इष्ट को , किसी शक्ति को* *आजमाने  के लिये साधना मत कीजिये क्योकि आपका* *अनुष्ठान बेकार तो जायेगा ही आपको नुकसान भी उठाना पड सकता है*
८. जल्दबाजी मे कोई भी साधना मत कीजिये क्योकि जल्दबाजी मे कोई काम सफल नही होता
तो साधना कैसे सफल होगी
९. अपनी हार को , परेशानी को , साधना के ऊपर हावी मत होने दें
नही तो आपको कुछ नही मिलेगा
१०. जाप के वक्त आपका ध्यान पूरी तरह से अपने मंत्र मे या उस मंत्र के देव मे होना चाहिये जिसका जाप कर रहे हो फिर चाहे वो मंत्र देव का हो या इतर योनि का हो
११.  साधना की पूरी प्रकिया को अच्छी तरह से समझ लेना चाहिये
तब साधना शुरू करनी चाहिये
१२. साधना हमेशा प्रेम से , शान्ति से करनी चाहिये हडबडी  नही करनी चाहिये
१३. *सबसे जरूरी बात जिस गुरू *से आपने साधना ली है उस पर पूरा विश्वास करना चाहिये*
*क्योकि सबसे पहले पूजा गुरू की की जाती है और यदि उस पर भरोसा ही नही है केवल पूजा की  फार्मल्टी  कर रहे हो तो आप* *सारी जिन्दगी पूजा जाप करते रहो कभी सफल नही हो सकते क्योकि गुरू ही साधना मे सफलता की कुंजी होता है* *इसलिये गुरू पूजन सबसे पहले किया जाता है और यदि हमने* *उसका पूजन ही मन से नही किया तो बाकी कोई भी शक्ति तुम्हारे* *आवाहन पर नही आयेगी ये ध्यान रखना*

अघोर लक्ष्मी साधना / Aghor Lakshmi Sadhna

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अघोर लक्ष्मी  साधना

अचानक धन लाभ के लिये



इस साधना से माता लक्षमी की कृपा होती है
तुरन्त ही साधक को धन का लाभ होता है
ये प्रयोग तब करना चाहिये जब हमे कही से कुछ मिलने की आस हो

वेसे इसे कभी भी करोगे तब भी माता कुछ ना कुछ दे ही देगी

ये प्रयोग नवराति  मे  पूरे नौ दिन करने पर अचूक फल. मिलता है

साधना विधि

नव रात्रि  की पहली  रात को
साधक नहा धोकर रात दस के बाद कभी भी ये प्रयोग कर लें


उत्तर मुख होकर बैठे
गुरू शिवजी पार्वती जी का पूजा करे
लक्ष्मी की पूजा करें
कुबेर की पूजा करें


उसके बाद मंत्र का इक्कीस  माला का जाप करें

जाप के बाद  दो माला का हवन करें 
हवन मे केवल  घी  सै हवन करें


संकल्प अवश्य लेले कि मै अचानक धन लाभ के लिये ये प्रयोग नौ दिन कर रहा हू

यदि नव रात्रि के अलावा ये प्रयोग करना हो तो
शुक्र वार से सुरू करे और पूरे ग्यारह दिन तक करते रहें

आपको धन लाभ हो जायेगा

इस का प्रयोग करके मेने कई लोगो को लाभ कराया था


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पूजन की छ शक्तियॉ और मंत्र / Pujan ki 6 Shaktiyan

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पूजन के देव


पंचोपचार पूजा मे नित्य आपको छ शक्तियों का पूजन करना है

गुरू , गणेश , इष्ट , कुल देव , पितर देव , स्थान देव

गुरू का पूजन
*ॐ श्री गुरूभ्यो नमः*
मंत्र से पूजा करें

गणेश का पूजन
*ॐ श्री गणेशाय नमः*
मंत्र से करें

इष्ट का पूजन
*ॐ श्री इष्ट देवतभ्यो नमः*
से करें

कुल देव का पूजन
*ॐ श्री कुल देवतभ्यो नमः*
*ॐ श्री कुल देविभ्यो नमः*
मंत्र से करें

पितरो का पूजन
*ॐ सर्वभ्यो पित्रभ्यो नमः*
मंत्र से करें


स्थान देव का पूजन
*ॐ स्थान देवतभ्यो  नमः*
मंत्र से करें


ये येसे मंत्र है जो सभी को याद होने चाहिये
इनके द्वारा नित्य पंचोपचार पूजन किया जाता है

बाकी पूजन की विधि प्राथमिक पूजन की पोस्ट में पढे


ये लिंक क्लिक करें और पूजन विधि पढ लें

https://hareshtantrakendra.blogspot.com/2017/09/blog-post_32.html?m=1



नीचे पूजन विधि हिन्दी मे दी है
इस पर क्लिक करे पढ लें

https://hareshtantrakendra.blogspot.com/2018/12/blog-post.html?m=1

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जाप समर्पित करना / Jaap Samarpit Karna

*हरेश तंत्र शक्ति साधना केंद्र*

जाप को समर्पित करना

जब भी आपका संकल्पित जाप पूरा हो गया हो तब सीधे हाथ में थोड़ा चावल व् जल लेकर बोले के हे देवी या देव या शक्ति मैंने आपका संकल्पित जाप पूरा किया इसका पूर्ण फल मुझे प्राप्त हो मैं आपको जाप समर्पित करता हूं, ऐसा कहकर जल व् अक्षत को देवता हो तो तो दायें हाथ में और देवी हो तो बाएं हाथ में समर्पित कर दे

*ये हमारे नए लिंक हैं सभी साधक इसे सेव करें*

*हरेश तंत्र शक्ति साधना केंद्र*




ये मेरे  लिंक है

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*निशुल्क तंत्र मंत्र साधना के लिये सम्पर्क करें*


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9690988493
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गुरू पुष्य योग / Guru Pushy Yog

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गुरू पुष्य योग


इस योग में जो लोग साधना करना चाहते है वो लोग तैयारी कर लें

बहुत शुभ योग है

इस योग मे *कामेच्छी अप्सरा* सिद्ध कर सकते है एक ही दिन में

अर्पणा अप्सरा कर सकते है

किसी परी की साधना कर सकते है क्योकि उस दिन जुमेरात है

कोई जिन्न , मुवक्किल साधना कर सकते है

उस दिन ईद भी है
तो मुस्लिम साधना भी बहुत बडिया होगी


कोई यंत्र बना सकते है
बिल्ली की जेर , सियारसिंगी ,हस्थाजोडी
या कोई और वस्तु सिद्ध कर सकते है

वशीकरण के मंत्र सिद्ध कर सकते है

अपामार्ग की हाजरात सिद्ध कर सकते है

धन का संकल्प लेकर लक्ष्मी कुबेर का जाप कर सकते है

नक्षत्रो का राजा पुष्य नक्षत्र जब गुरुवार या रविवार के दिन पडता है तो बहुत ही शुभ योग बनता है

इसे गुरू पुष्य और रवि पुष्य के नाम से जाना जाता है



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हरेश तंत्र सिफली हमजाद / Sifli Hamjad

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*सिफली हमजाद*


ये वो शक्ति है जो किसी को भी आसानी से सिद्ध हो सकती है

इसकी कुछ शर्ते है
जो ये शर्ते पूरी कर सके
बता देना


 १. इसके लिये साधक को साधना काल में तक नहाना नही है
जितना हो सके गन्दा रहे

२. ये सात दिन का अमल है

३. इसमे कुछ मुसलिम नियम रखने पडते है
और मुसलिम मंत्रो का जाप करना पडता है
४.  ये बहुत ज्यादा डराता है
भय देता है
केवल निडर और साहसी व्यक्ति ही सम्पर्क करे

५.  और सबसे जरूरी बात
जिसके इस्ट देवी हो उसको ये अमल सिद्ध नही होगा
चाहे कोई देवी हो

 ७. जिसके आस पास कुऑ  मिल जाये जहॉ लोग पानी कम भरते हो या नही भरते हो

*ये अमल होता ही होता है*

जो करना चाहे बता दें

तो जो साधक करना चाहे मुझे पर्सनल सम्पर्क करें

मगर हॉ शर्तो को पहले पढ लो समझ लो
कर सको तो हॉ करो
मेरा समय खराब मत करना फालतू में

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कनक धारा स्त्रोत / Kanak dhara Strotra

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कनकधारा स्त्रोत




धन आज के जीवन की सबसे बडी आवश्यकता है
जिसके पास ये धन नही होता है उसका जीवन बहुत कष्टमय गुजरता है

जीवन मे धन की जरूरत सभी होती है
चाहे वो कोई भी हो

हमारे तंत्र मे धन के लिये बहुत से मंत्र , तंत्र , टोटके , स्त्रोत आदि दे रखे हैं


कनक धारा स्त्रोत माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने का  सबसे सरल तरीका है

इसके मात्र जाप से लक्ष्मी माता प्रसन्न हो जाती है
 जिससेे धन की कमी पूरी होती है

साधक को आवश्यकता अनुरूप धन प्राप्त होता है

इसका मेने और मेरे शिष्यो ने प्रयोग किया और आशातीत सफलता पायी

इसके पाठ से आपके रूके हुये धन सम्बन्धित कार्य हो जाते है
कार्य व्यापार ठीक से चलने लगते है

आमद बढ जाती है

यदि इसे ठीक से सिद्ध कर लिया जाये तो अचानक से प्रचुर मात्रा मे धन प्राप्त हो जाता है




स्त्रोत




अंगं हरेः पुलक भूषणमाश्रयन्ती
भृगांगनेव मुकला भरणम् तमालम्

अगीं कृता अखिल विभूति रपांग लीला
मांगल्यदाsस्तु मम् मंगलदेवतायाः

मुग्धा मुहुर्विधती बदने मुरारे
 प्रेमत्रपा प्रिणिहितानि गताsगतानि

माला दृशोर्म धुकरीव महोत्पले या सामे श्रियं दिशतु सागर सम्भवाया


विश्वामरेन्द्रपद विभ्रम दान दक्षन्मानंद
हेतुरधिकं मुर विद्विषो sपि

ईषान्नि षीदतु मयि क्षणमीक्षणार्द्व
मिन्दीवरोदर सहोदर मिन्दीरायः


अमीऩिताक्ष माधिगम्य मुदा मुकन्द
मानन्द कन्द मनिमेष मनंग तंत्रम्

आकेकर स्थित कनीनिक पद्य नेत्रं
भूत्वै भवैत्रम भुजंग शयांगनायाः


बाह् वन्तरे मधुजितः श्रित कौस्तुभे या
हारावलीव हरिनीलमयी विभाति

कामप्रदा भगवती sपि कटाक्ष माला
कल्याण मावहतु मे कमलालयायाः

कालाम्वुदालि ललितोरसि कैटभारे
र्धाराधरे स्फुरति या तडिदंगनेव


मातुः समस्त जगतां महनीय मूर्ति
र्भर्दाणि में दिशतु भार्गव नन्दनायाः



प्राप्तं पदं प्रथमतः खलुयत् प्रभावान
मांगलय भाजि मधु मथिनि मन्मथेन


मय्या पतेत् तदिह मन्थर मीक्षणार्द्धम्
मन्दाsलसच्च मकरालय कन्यकायाः


दद्यात् दयानुपवनो द्रविणाम्बुधारा
मस्मिन्नकिच्चन विहंगशिशौ विषष्णे

दुष्कर्म धर्म मपनीय चिराय  दूरं दूरं
नारायण प्रणयिनी नयनाम्बुवाहः

इष्टा विशिष्ट मतयोsपि यथा दयार्द
दृष्ट़या त्रिविष्टप पदं सुलभं लभन्ते

दृष्टि प्रहष्ट कमलोदर दीप्ति रिष्टां
पुष्टिं कृपीष्ट मम् पुष्कर विष्टरायाः

गीर्देवतेति गरूड ध्वजसुन्दरीति
शकम्भरीति शशि शेखर बल्लभेति


सृष्टि स्थित प्रलय केलिषु  संस्थितायै
तस्यं ममस्त्रिभुवनैक गुरौस्तरूण्यै


श्रुत्यै नमोsस्तु शुभ कर्म फल प्रसुत्यै रंत्यै
नमोsस्तु रमणी़य गुणार्णवायै


शक्तयै नमोsस्तु शतपत्र निकेतनायै
पुष्ट्यै नमोsस्तु पुरूषोत्तम बल्लभायै


नमोsस्तु नालीक निभाननायै
नमोsस्तु दुग्धो दधि जन्म भूत्यै


नमोsस्तु सोमामृत सोदरायै
नमोsस्तु नारायण वल्लभायै



सम्पतकराणि सकलेन्द्रिय नन्द नानि
साम्राज्यदान विभवानि सरोरूहाक्षि


त्वद वन्दनानि हरिताहरणो द्यतानि
मामेव मातर निशं कलयन्तु मान्ये


यत्कटाक्ष समुपासना विधिः
सेवकस्य सकलार्थ  सम्पदः


सन्तनोति वचनाsगं  मानसै 
स्त्वां  मुरारि ह्रदयेश्वरी भजै

सरसिज निलये  सरोज हस्ते
धवलतमांशुक गंध माल्यशोभे

भगवति हरिवल्लभे  मनाज्ञे
त्रिभुवन भूतिकारी प्रसिद्ध मह्यम्


दिग्धस्तिभिः कनक कुम्भ सुखाव
सृष्ट
स्वर वाहिनी विमल चारू जलप्युतांगीम्


प्रातर्नमामि जगतां जननीमशेष
लोकाधिनाथ गृहिणो ममृताब्धिपुत्रीम्


कमले कमलाक्ष वल्लभे त्वं
 करूणापूर तरंगितैर पांगैः


अवलोकय मामकिंचनानां
प्रथमं पात्र कृत्रिम दयायाः


स्तुवन्ति ते स्तुतिभिरमु भिरन्वह
त्रयीमयी त्रिभुवन मातरं रमाम्

गुणाधिका  गुरूतर भाग्य भागिनो
भवन्ति ते भुवि बुधभाविताशयाः




ये है कनक धारा स्त्रोत

इसका जाप गुरूवार को प्रातकाल उत्तर मुख होकर लक्ष्मी कुबेर का पूजन करके करें



पूजन सामान्य पचोपचार दें
हो सके तो खीर का नैवेद्य प्रदान करें

जितने पाठ जाप करेगे आपको फल की प्राप्ति भी वेसे ही होगी

अनुष्टठान को कम से कम 11 से 21 दिन करना चाहिये

या हो सके तो नित्य पॉच पाठ सुबह पॉच पाठ शाम को करने चाहिये


पाठ से पहले संकल्प लेना चाहिये
संकल्प केसे ले उसके लिये संकल्प की पोस्ट पढे

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चौसठ योगिनी साधना /Chosath Yogini Sadhna

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चौसठ योगिनी साधना


आज मे आपको चौसठ योगिनी की साधना बता रहा हू
इस साधना को करने के बाद साधक पर चौसठ योगिनी कृपा करती है
और एक दो योगिनी हमेशा साथ रहती है और कार्य करती है

ये साधना वीर भाव की है
माता के रूप मे सभी योगिनयो का ध्यान किया जाता है

इससे साधक के सभी बिगडे  काम संवर जाते है

और सुख सौभाग्य मे वृद्धि होती है
साधक लम्बी आयु जीता है
और बहुत नाम और यश कमाता  है
इस एक साधना को करने से ही मनुष्य सबकुछ पा लेता है


साधना विधि



किसी भी अमावस्या या पूर्णिमा को ये साधना शुरू करनी चाहिये
रात को दस बजे साधक नहा कर सफेद या लाल स्वच्छ कपडे पहने
लाल आसन पर बैठे

सामने जमीन पर चौसठ सुपारी को योगिनी मानकर रखें

सबसे पहले गुरू का पंचोपचार पूजन करें
उसके बाद माता दुर्गा का पूजन ध्यान करें
फिर अपने इस्ट का पूजन करें
 योगिनी साधना मे कुल देव या कुल देवी का विशेष महत्व है
इसलिये इनका पूजन अवश्य दें
पितरो और स्थान देव का पूजन करें

इन सभी से साधना मे सफलता का आशिर्वाद लें
और साधना की आज्ञा मॉगे


संकल्प लेले

इसके बाद हाथो मे चावल लेकर
चौसठ योगिनियो का आवाहन करें
और उन चावल को सुपारियो  पर डाल दें

सभी सुपारी पर रोली से टीका लगायें
सभी का एक साथ पूजन करें

फिर उनका माता के रूप मे पूजा करें

चंदन , धूप ,दीप घी का , रोली ,
फूल जो मिल जाये , चावल को लाल पीले कर लेना वो चडाना  हल्दी रोली मिलाकर

,वस्त्र के रूप मे एक लाल रंग की साडी ,जिसे साधना  के बाद मॉ को दे दें मॉ ना हो तो चाची ,दादी को दे दें ,लाल चूडी, चुनरी लाल रंग की ,ये सब मॉ को देदे साधना के बाद ,

कम से कम ढाई सौ ग्राम बडिया मिठाई का भोग लगायें
 खीर और पॉच पूडी  का भोग लगाये नित्य रोज
प्रतिदिन
पानी दे किसी लोटे मे पीने को


उसके बाद मंत्र का जाप करें और वहीं कमरे मे ही सोये


मंत्र का जाप रूद्राक्ष की माला से करें जाप इक्कीस माला का करना है रोज

ये प्रयोग लगातार इक्कीस दिन करें
इकीसवे  दिन सभी योगिनयो का विसर्जन कर दें

और जो योगिनी प्रत्यक्ष हो उससे कृपा मॉग लें
और हमेशा साथ रहने का वचन मॉग लें

इस साधना से साधक पर हमेशा योगिनी की कृपा बनी रहती है और वो घर समाज मे सबका प्रिय और चहेता बना रहता है


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