अलौकिक शक्तियो का परिचय

 हमारे केन्द्र द्वारा पहले एक बेसिक बुक लिखी गयी है जिसमे पूजन के साधना के सभी नियम कानून एवम् विधि विधान दिये गये इस दूसरी बुक *अलौकिक शक्तियो का परिचय* मे  85 प्रकार के  भूत प्रेत जिन्न जिन्नात यक्ष परी देवी देवताओ का पूर्ण परिचय दिया गया है साथ मे इनके लक्षण भी दिये गये है आप लोग पढकर लाभ उठाये इस बुक को पढने के बाद आप लोग अच्छी तरह से इलाज करना सीख जायेगे   दोनो बुक  मंगाने के लिये केन्द्र के नम्बर पर सम्पर्क कर सकते है 9690988493 पर 

हरेश तंत्र बेसिक बुक

 हरेश तंत्र शक्ति साधना केन्द्र 



*हरेश बेसिक तंत्र ज्ञान बुक*


*बुक प्राइस 450₹ मात्र*

 सौ रूपये कोरियर चार्ज अलग

किसी भी कार्य को सीखने के लिये सबसे पहले उसकी बेसिक जानकारी होना बहुत होता है 

येसे ही तंत्र सीखने से पहले तंत्र की बेसिक जानकारी होना बहुत जरूरी है ताकि आप लोग वक्त पडने पर सही फैसले ले सके 

बिना बेसिक के लोगो की साधना सफल नही होती इसलिये आपके अपने जाने पहचाने  तांत्रिक हरेश कुमार गुरूजी ने अपने अनुभव और अपने ज्ञान से  *हरेश बेसिक तंत्र ज्ञान* नाम की    पुस्तक को लिखा गया है जिसमे साधक को कब , क्या , केसे करना चाहिये वो सभी विस्तार से दिया गया है हमारे द्वारा जो बेसिक करवाया जाता है उसका पूरा ज्ञान इस पुस्तक मे दिया गया है 

येसे साधक जिनके पास टच मोबाइल नही है , येसे साधक जो लिंक वगेरह नही खोल सकते उनके लिये ये पुस्तक किसी वरदान से कम नही है 

आप सभी इस पुस्तक मंगाये और पढें इसमे दी गयी सभी जानकारी आपके जीवन काम आयेगी और आपको साधनाओ मे सफलता दिलवायेगी  *इस पुस्तक मे *पूरी बेसिक जानकारी , सभी कवच कीलन मंत्र , सभी नियमो को विस्तार से बताया गया है*


इस पुस्तक का *मूल्य मात्र तीन सौ  450₹ रूपये* लिया जा रहा है  जिस किसी भाई को ये पुस्तक मंगानी हो वो तीन सौ रूपये जमा करके पूरा पता पिन कोड , फोन नम्बर सहित देकर ये पुस्तक मंगवा सकते है इस पुस्तक मे येसी बहुत सी जानकारी है जो आपकी साधना को पूरी तरह से सफलता के शिखर पर पहुचा देगी 



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*बुक के साथ कोरियर चार्ज सौ रूपये अलग से भेजे*

*टोटल 550 रूपये*

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*और ये पुस्तक आप किसी और दूसरे व्यक्ति को पढने के लिये दे सकते हो , चाहे वो कोई भी हो  अपने दोस्त , मित्र , रिश्तेदार ,अन्य कोई साधक हो सभी को आप ये पुस्तक पढने दे सकते हो*


पेमेंट नीचे दिये खाते मे करके रसीद या स्क्रीन सॉट भेजकर पुस्तक मंगवा सकते है 

हरेश तंत्र शक्ति साधना केन्द्

एच डी एफ सी बैंक 

एकाउन्ट डिटेल

nam - haresh kumar 

ac - 50200043273526

ifc cod -  hdfc0009096

गूगल पे ---9690988493

पूजनकी विधि संस्कृत में* आज मे आपको प्राथमिक पूजन की विधी बता रहा हू कुछ भाई पूजन विधि जाने बिना ही साधना करते है नतीजा साधना सफल नही होती विधि १ सबसे पहले नहा धोकर साफ कपडे पहने फिर आसन पर ये मंत्र एक बार पढकर बैठे *मन मार मैदान करू करू मे चकना चूर पॉच महेश्वर आज्ञा करो तो बैठू आसन पूर* २ बैठने के बाद पवित्री करण करे इस मंत्र से 👇 बाये हाथ मे जल ले उसमे दाये हाथ की पाचो उगली डालकर मंत्र बोले *ॐ अपवित्र पवित्रो वा सर्वेस्थाम गतोअपि स्मेरेत पुडिरीकाक्षः सः बाह्म्भयंतर शुचि ॐपुनात पुडंरीकाक्षाय ॐपुनात पुडंरी काक्षाय ॐपुनात पू* फिर पानी को सर पर , पूजन सामग्री पर छिडक दें ३ फिर आचमन करो तीन बार मंत्र बोले ॐकेशवाय नमः ॐमाधवाय नमः ॐ नारायणाय नमः मंत्र बोलकर दाये अगूठे से दो बार होठ पोछकर हाथ धोले ४ फिर प्राणायाम करे तीन बार एक नथुने से सॉस ले थोडी देर रोके और दूसरे से निकाल दे फिर जिससे सॉस निकाली है उससे सॉस ले थोडी देर रोके दूसरे नथुने से निकाल दें ५ फिर दीपक निम्न मंत्र बोलकर जलाये *ॐ ज्योत ज्योत महा ज्योत सकल ज्योत जगाये तुमको पूजे सकल संसार ज्योत माता तू ईश्वरी तू हमारी धरम की माता हम तेरे धरम के पूत* *ॐ ज्योति पुरूषाय धीमहि तन्नो ज्योत निरंजन प्रचोदयात* ६ फिर दो अगर बत्ती लगाये ७ फिर गुरूजी का पूजन करे ८ फिर गणेश जी का पूजन करे ९फिर इष्ट देव का पूजन करे १०फिर कुल देव का पूजन करे ११ फिर पितरो का पूजन करें १२ फिर स्थान देव का पूजन करे *पूजन विधि* जिसका पूजन करना है उसका आवाहन करे दाये हाथ मे चावल पानी ले मंत्र बोले अहम् त्वाम ( श्री गुरूभ्यो ) आवाहनम् करिष्ये इहागच्छ तिष्ठ इदम आसनम समर्पियामि ( कोस्टक मे आप जिस गुरू या देव या देवी को बुलारहे हे उसका नाम ले ) चावल आसन या जमीन पर छोड दें हाथ से बैठने का इशारा करे 2 फिर देवताओ के पैर धुलने के लिये एक चम्मच पानी कटोरी मे या किसी अन्य पात्र मे डालें और बोले हे महाराज मै आपके पैर धुल रहा हू फिर वस्त्र के रूप मे कलावा , मौली भेंट करें और बोले इदम् वस्त्रम् समर्पियामि फिर चन्दन दें इदम् चंदनम समर्पियामि फिर चावल दें इदम् अक्षतम् समर्पियामि फिर फूल या इत्र दे इदम् सुगन्धि समर्पियामि अगरबत्ती की तरफ हाथ से इशारे करे इदम् धूपम् घ्रहणयामि दीप दिखाये इदम् दीपम् दर्शयामि फिर मिठाई या बताशा दें इदम् नैवेध निवैदयामि जल दें इदम् जल समर्पियामि येसे ही सभी शक्तियों का क्रम से पूजन करते जाये गुरू गनेश इष्ट कुल देव पितर और स्थानदेव का करना है सुबह और शाम *पूजन विसर्जन विधि* अब आता है जब हमारी पूजा पूरी हो गयी है और देवो को विसर्जित करना है तो ये उसकी की विधि है हाथ मे थोड़े से चावल लेकर निम्न मंत्र बोलें *मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वर* *यत्पूजितं माया देवं परिपूर्ण तदस्तु मे* *आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम* *पूजनम न जानामि क्षमस्व परमेश्वर।।'* *निज मन्दिरम गछ गछ परमेश्वरा* *निज मन्दिरम गछ गछ परमेश्वरी* ये दो बार बोलना है फिर वो चावल जमीन पर डाल दें फिर खडे हो जाये at March 17, 2018 Email This BlogThis! Share to Twitter Share to Facebook Share to Pinterest No comments: Post a comment

  पूजन की विधि 


संस्कृत मे हरेश तंत्र शक्ति साधना केन्द्र *पूजन की विधि संस्कृत में* आज मे आपको प्राथमिक पूजन की विधी बता रहा हू कुछ भाई पूजन विधि जाने बिना ही साधना करते है नतीजा साधना सफल नही होती विधि १ सबसे पहले नहा धोकर साफ कपडे पहने फिर आसन पर ये मंत्र एक बार पढकर बैठे *मन मार मैदान करू करू मे चकना चूर पॉच महेश्वर आज्ञा करो तो बैठू आसन पूर* २ बैठने के बाद पवित्री करण करे इस मंत्र से 👇 बाये हाथ मे जल ले उसमे दाये हाथ की पाचो उगली डालकर मंत्र बोले *ॐ अपवित्र पवित्रो वा सर्वेस्थाम गतोअपि स्मेरेत पुडिरीकाक्षः सः बाह्म्भयंतर शुचि ॐपुनात पुडंरीकाक्षाय ॐपुनात पुडंरी काक्षाय ॐपुनात पू* फिर पानी को सर पर , पूजन सामग्री पर छिडक दें ३ फिर आचमन करो तीन बार मंत्र बोले ॐकेशवाय नमः ॐमाधवाय नमः ॐ नारायणाय नमः मंत्र बोलकर दाये अगूठे से दो बार होठ पोछकर हाथ धोले ४ फिर प्राणायाम करे तीन बार एक नथुने से सॉस ले थोडी देर रोके और दूसरे से निकाल दे फिर जिससे सॉस निकाली है उससे सॉस ले थोडी देर रोके दूसरे नथुने से निकाल दें ५ फिर दीपक निम्न मंत्र बोलकर जलाये *ॐ ज्योत ज्योत महा ज्योत सकल ज्योत जगाये तुमको पूजे सकल संसार ज्योत माता तू ईश्वरी तू हमारी धरम की माता हम तेरे धरम के पूत* *ॐ ज्योति पुरूषाय धीमहि तन्नो ज्योत निरंजन प्रचोदयात* ६ फिर दो अगर बत्ती लगाये ७ फिर गुरूजी का पूजन करे ८ फिर गणेश जी का पूजन करे ९फिर इष्ट देव का पूजन करे १०फिर कुल देव का पूजन करे ११ फिर पितरो का पूजन करें १२ फिर स्थान देव का पूजन करे *पूजन विधि* जिसका पूजन करना है उसका आवाहन करे दाये हाथ मे चावल पानी ले मंत्र बोले अहम् त्वाम ( श्री गुरूभ्यो ) आवाहनम् करिष्ये इहागच्छ तिष्ठ इदम आसनम समर्पियामि ( कोस्टक मे आप जिस गुरू या देव या देवी को बुलारहे हे उसका नाम ले ) चावल आसन या जमीन पर छोड दें हाथ से बैठने का इशारा करे 2 फिर देवताओ के पैर धुलने के लिये एक चम्मच पानी कटोरी मे या किसी अन्य पात्र मे डालें और बोले हे महाराज मै आपके पैर धुल रहा हू फिर वस्त्र के रूप मे कलावा , मौली भेंट करें और बोले इदम् वस्त्रम् समर्पियामि फिर चन्दन दें इदम् चंदनम समर्पियामि फिर चावल दें इदम् अक्षतम् समर्पियामि फिर फूल या इत्र दे इदम् सुगन्धि समर्पियामि अगरबत्ती की तरफ हाथ से इशारे करे इदम् धूपम् घ्रहणयामि दीप दिखाये इदम् दीपम् दर्शयामि फिर मिठाई या बताशा दें इदम् नैवेध निवैदयामि जल दें इदम् जल समर्पियामि येसे ही सभी शक्तियों का क्रम से पूजन करते जाये गुरू गनेश इष्ट कुल देव पितर और स्थानदेव का करना है सुबह और शाम *पूजन विसर्जन विधि* अब आता है जब हमारी पूजा पूरी हो गयी है और देवो को विसर्जित करना है तो ये उसकी की विधि है हाथ मे थोड़े से चावल लेकर निम्न मंत्र बोलें *मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वर* *यत्पूजितं माया देवं परिपूर्ण तदस्तु मे* *आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम* *पूजनम न जानामि क्षमस्व परमेश्वर।।'* *निज मन्दिरम गछ गछ परमेश्वरा* *निज मन्दिरम गछ गछ परमेश्वरी* ये दो बार बोलना है फिर वो चावल जमीन पर डाल दें फिर खडे हो जाये at March 17, 2018    Email This BlogThis! Share to Twitter Share to Facebook Share to Pinterest No comments: Post a comment

दिसम्बर पैड ग्रुप

 हरेश  तंत्र शक्ति साधना केन्द्र


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*दिसम्बर  पैड ग्रुप*


हर माह की तरह इस माह दिसम्बर   मे कुछ विशेष साधना इस ग्रुप में सिखाई और बतायी जायेगी


*इस पैड ग्रुप का शुल्क मात्र 750/ रूपये रखा गया है* 


इस ग्रुप मे निम्न साधनाये  आपको मिलेगीं


*साधना*

१.हर तरह की बीमारी ठीक करने के लिये *शिव रोग नाशक साधना*


२. *काली का एक दिव्य मंत्र* जिससे होते है कई दिव्य काम 


३. त्रिदेवोका रूप  *दत्तात्रेय साधना* हर मनोकामना की पूर्ति के लिये


४. *किसी भी तरह का बंधन खोलने और बंधन लगाने का एक ही मंत्र* टू इन वन


५. *एक शमशानी  बेनामी शक्ति जो करती है केवल भोग पर कार्य* 


*सूर्य ग्रहण विशेष*


चार तारीख अमावस्या को सूर्य ग्रहण है 

इस ग्रहण मे करें 

*रत्नाकर योगिनी साधना*



✋🏻 *दिसम्बर  ग्रुप की शान* ✋ 


*एकअचूक मारण क्रिया जिससे किसी भी शत्रु का बचना है नाममुकिन*



ये सब आपको दिसम्बर माह के पैड ग्रुप मे मिलेगा इसका *शुल्क मात्र 750/रूपये* रखा गया है 



जिसे आपको निम्न एकाउंट मे जमा करना है 

जमा करके उसकी रसीद , स्क्रीनसॉट,गुरूजी के पर्सनल नम्बर पर या  हमें निम्न नम्बरों पर व्हाट्सएप करे


हरेश तंत्र शक्ति साधना केन्द्र


*HDFC BANK MATHURA BRANCH*

Name - *Haresh kumar*

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IFSC Code - *HDFC0009096*


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Phone Pay - *9690988493*


नोट :- हमारे सभी पेड ग्रुप Telegram पर संचालित होते हैं इसलिये ग्रुप मे जुड़ने के लिए telegram इंस्टॉल करें

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गुरू मंत्र माला से करने का नियम / Guru mantra Mala Se karne ke Niyam


गुरू मंत्र माला से करने का नियम


मे जो गुरू मंत्र आपको देता हू उसका आपको मानसिक जाप करना है 

दो घन्टे के लिये बाकी बाईस घन्टे चलते फिरते खाते पीते जाप करते रहें 

किसी कारण से यदि मानसिक जाप करने मे दिक्कत आ रही हो 

तो आप लोग माला लेकर जाप कर सकते है 

माला से जाप करने पर पूरे नियम का पालन करना होगा 


नियम नीचे दे रहा हू 

१. गुरू मंत्र का कम से कम नित्य का ग्यारह हजार का जाप करना अनिवार्य है अधिक कर लें तो क्या कहने 

२. जाप उपाशु करना है यानि बुदबुदाकर 

३. माला 

शिव , भैरव , काली , के इस्ट होने पर रूद्राक्ष की माला से जाप करें 

कृष्ण , का जाप वैजयन्ती , रूद्राक्ष  से

राम हनुमान का तुलसी से 

हनुमान का मूगें ,तुलसी , रूद्राक्ष से 

मुस्लिम मे तसबी या हकीक से 

दुर्गा का जाप लाल मूँगा या रूद्राक्ष से 

बगलामुखी का हल्दी की माला या रूद्राक्ष से 

विषेश माला ना मिलें तो 

सभी का जाप रूद्राक्ष की माला से आप लोग कर सकते है 


४. दिशा 

धन चाहने वालो को पश्चिम मुख होकर जाप करना चाहिये 

शक्ति चाहने वालो को उत्तर मुख होकर जाप करना चाहिये 

ज्ञान चाहने वालो को पूरब मुख होकर जाप करना चाहिये 

शत्रु नाश या शत्रु से छुटकारा पाने के लिये दक्षिण मुख होकर जाप करना चाहिये 


५.  जाप का याद रखें ग्यारह हजार से कम ना हों 

६. कही बाहर जाने पर 

यदि दो चार दिन पूजन नही करोगे तो 

कोई दिक्कत नही होती 

निसंकोच  बाहर जा सकते हो 

७. उपाशु जाप हमेशा ही एकान्त मे करें ताकि मंत्र गुप्त रह सकें 

८. गुरू मंत्र के लिये किसी अन्य नियम के पालन की आवश्यकता नही है 

जैसे ब्रह्मचर्य , जमीन पर सोना , मॉस वगैरह खाना पीना 

ये सब खा पी सकते हो बस उस दिन जाप मत करना 

९. जाप संकल्प लेकर करें तो अधिक त्वरित परिणाम प्राप्त होता है 

 जाप के बाद जाप इस्ट को समर्पित कर दें 

१०.  जिन लोगो को मुक्ति प्राप्त करनी है मोक्ष पाना है वो गुरू मंत्र का मानसिक जाप ही करें माला से नही करें 

११. माला से वही लोग जाप करें जिने  मुक्ति से कोई लेना देना नही है

१२.  मानसिक जाप का फल अधिक मिलता है 

उपाशु का कम 


तो ये थे सामान्य नियम जिनका पालन करके आप अपने गुरू मंत्र से मन चाहा कार्य ले सकते है और अपनी मनोकामना पूरी कर सकते है 


अधिक जानकारी के लिये सम्पर्क करें 

हरेश तंत्र शक्ति साधना केन्द्र 

9690988493

8384844021

उतारा जो करे किये कराए को नष्ट करें ( पर्व विशेष )/ Utaara Kare kiye Karaye Ko Nast

हरेश तंत्र शक्ति साधना केन्द्र

होली विशेष

सभी लोग आज ज्योत अवश्य करें 

अपने सभी मंत्रो को जाग्रत करें 

सभी शक्तियों को भोग दें 

अपने परिवार के सभी सदस्यो को बिठाकर उनके सर से इक्कीस बार निम्न सामग्री का उतारा ( उसार लें )कर लें

इससे नजर , गुजर , हल्की फुल्की दिक्कत , किया कराया खतम हो जाता है ये क्रिया आप होली दिवाली की रात को अवश्य किया करें

इससे परिवार मे खुशहाली आती है प्रेम बडता है 

घर की निगेटविटी खतम होती है

सामग्री

इक्कीस लौंग 

पॉच बताशे 

एक बूंदी का लड्डू 

या मिठाई एक पीस 

एक नीबूं 

ग्यारह काली मिर्च के दाने 

पॉच साबुत लाल मिर्च 

एक कपूर की टिक्की  


ये सब सामग्री लेकर अपने परिवार के सिर से ऊसार कर किसी एकान्त जगह पर रख आये 

कहीं भी रख आये घर से बाहर 

नोट - किसी को यदि कुछ ज्यादा परेशानी हो तो साथ मे एक जायफल भी रख लें

उतारा अपने कुल देव या इस्ट के नाम से करें 

सामग्री सरल है घर पर ही मिल जायेगी 

इसमे दिशा का कपडे का और केसा भी कोई बन्धन नही है 

पूजन की विधि संस्कृत में/ Pujan ki Vidhi Sanskrit Main

  

हरेश तंत्र शक्ति साधना केन्द्र 

पूजन की विधि संस्कृत में

आज मे आपको प्राथमिक पूजन की विधी बता रहा हू 
कुछ भाई पूजन विधि जाने बिना ही साधना करते है 
नतीजा साधना सफल नही होती 

विधि 
१ सबसे पहले नहा धोकर साफ कपडे पहने फिर आसन पर ये मंत्र एक बार पढकर बैठे 
मन मार मैदान करू करू मे चकना चूर ।
पॉच महेश्वर आज्ञा करो तो बैठू आसन पूर ।।

२ बैठने के बाद पवित्री करण करे इस मंत्र से 👇 बाये हाथ मे जल ले उसमे दाये हाथ की पाचो उगली डालकर मंत्र बोले 
ॐ अपवित्र पवित्रो वा सर्वेस्थाम गतोअपि ।
स्मेरेत पुडिरीकाक्षः सः बाह्म्भयंतर शुचि ।
ॐ पुनात पुडंरीकाक्षाय ॐ पुनात पुडंरी काक्षाय ॐ पुनात पू ।।
फिर पानी को सर पर , पूजन सामग्री पर छिडक दें 

३ फिर आचमन करो तीन बार मंत्र बोले 
ॐकेशवाय नमः ॐमाधवाय नमः ॐ नारायणाय नमः
मंत्र बोलकर दाये अगूठे से दो बार होठ पोछकर हाथ धोले

 ४ फिर प्राणायाम करे तीन बार एक नथुने से सॉस ले थोडी देर रोके और दूसरे से निकाल दे फिर जिससे सॉस निकाली है 
उससे सॉस ले थोडी देर रोके दूसरे नथुने से निकाल दें 

५ फिर दीपक निम्न मंत्र बोलकर जलाये 
ॐ ज्योत ज्योत महा ज्योत सकल ज्योत जगाये 
तुमको पूजे सकल संसार ज्योत माता तू ईश्वरी 
तू हमारी धरम की माता हम तेरे धरम के पूत 
ॐ ज्योति पुरूषाय धीमहि तन्नो ज्योत निरंजन प्रचोदयात

६  फिर दो अगर बत्ती लगाये
 ७  फिर गुरूजी का पूजन करे 
८  फिर गणेश जी का पूजन करे 
९  फिर इष्ट देव का पूजन करे 
१० फिर कुल देव का पूजन करे 
११ फिर पितरो का पूजन करें
१२ फिर स्थान देव का पूजन करे 

*पूजन विधि* 

जिसका पूजन करना है उसका आवाहन करे दाये हाथ मे चावल पानी ले मंत्र बोले 
*अहम् त्वाम ( श्री गुरूभ्यो ) आवाहनम् करिष्ये इहागच्छ तिष्ठ इदम आसनम समर्पियामि* 
( कोस्टक मे आप जिस गुरू या देव या देवी को बुलारहे हे उसका नाम ले ) चावल आसन या जमीन पर छोड दें हाथ से बैठने का इशारा करे
 2 फिर देवताओ के पैर धुलने के लिये एक चम्मच पानी कटोरी मे या किसी अन्य पात्र मे डालें और बोले हे महाराज मै आपके पैर धुल रहा हू 

फिर वस्त्र के रूप मे कलावा , मौली भेंट करें और बोले 
इदम् वस्त्रम् समर्पियामि
 
फिर चन्दन दें *इदम् चंदनम समर्पियामि*

फिर चावल दें *इदम् अक्षतम् समर्पियामि*

फिर फूल या इत्र दे *इदम् सुगन्धि समर्पियामि*

अगरबत्ती की तरफ हाथ से इशारे करे बोले *इदम् धूपम् घ्रहणयामि*

फिर दीप दिखाये *इदम् दीपम् दर्शयामि*

फिर मिठाई या बताशा दें  बोले *इदम् नैवेध निवैदयामि* 

जल दें *इदम् जल समर्पियामि*

 येसे ही सभी शक्तियों का क्रम से पूजन करते जाये गुरू गनेश इष्ट कुल देव पितर और स्थानदेव कापूजन रोज करना है  सुबह और शाम 

*पूजन विसर्जन विधि* 

अब आता है जब हमारी पूजा पूरी हो गयी है और देवो को विसर्जित करना है तो ये उसकी की विधि है हाथ मे थोड़े से चावल लेकर

 निम्न मंत्र बोलें 
मंत्र हीनं  क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वर ।
 यत्पूजितं माया देवं परिपूर्ण तदस्तु मे ।।
 आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम ।
 पूजनम न जानामि क्षमस्व परमेश्वर।। 
निज मन्दिरम गछ गछ परमेश्वरा ।
निज मन्दिरम गछ गछ परमेश्वरी ।।

ये दो बार बोलना है फिर वो चावल जमीन पर डाल दें फिर खडे हो
 जाये



पंचोपचार पूजन विधि संस्कृत में

 


पूजन की विधि संस्कृत मे

हरेश तंत्र शक्ति साधना केन्द्र
 *पूजन की विधि संस्कृत में* 
आज मे आपको प्राथमिक पूजन की विधी बता रहा हू कुछ भाई पूजन विधि जाने बिना ही साधना करते है नतीजा साधना सफल नही होती
 विधि 
१ सबसे पहले नहा धोकर साफ कपडे पहने फिर आसन पर ये मंत्र एक बार पढकर बैठे
 *मन मार मैदान करू करू मे चकना चूर पॉच महेश्वर आज्ञा करो तो बैठू आसन पूर* 
२ आसन पर बैठने के बाद पवित्री करण करे इस मंत्र से 👇 बाये हाथ मे जल ले उसमे दाये हाथ की पाचो उगली डालकर मंत्र बोले *ॐ अपवित्र पवित्रो वा सर्वेस्थाम गतोअपि स्मेरेत पुडिरीकाक्षः सः बाह्म्भयंतर शुचि ॐपुनात पुडंरीकाक्षाय ॐपुनात पुडंरी काक्षाय ॐपुनात पू* फिर पानी को सर पर , पूजन सामग्री पर छिडक दें

 ३ फिर आचमन करो 
आचमन के लिये तीन बार मंत्र बोले ॐकेशवाय नमः ॐमाधवाय नमः ॐ नारायणाय नमः मंत्र बोलकर दाये अगूठे से दो बार होठ पोछकर हाथ धोले
 ४ फिर प्राणायाम करे तीन बार 
दाये  नथुने से सॉस ले थोडी देर रोके और बाये नथुने  से निकाल दे फिर जिससे सॉस निकाली है उससे सॉस ले थोडी देर रोके दूसरे नथुने से निकाल दें 
५ फिर दीपक निम्न मंत्र बोलकर जलाये
 *ॐ ज्योत ज्योत महा ज्योत सकल ज्योत जगाये तुमको पूजे सकल संसार ज्योत माता तू ईश्वरी तू हमारी धरम की माता हम तेरे धरम के पूत* *ॐ ज्योति पुरूषाय धीमहि तन्नो ज्योत निरंजन प्रचोदयात* ६ फिर दो अगर बत्ती लगाये 

७ फिर गुरूजी का पूजन करे
 ८ फिर गणेश जी का पूजन करे 
९फिर इष्ट देव का पूजन करे 
१०फिर कुल देव का पूजन करे 
११ फिर पितरो का पूजन करें 
१२ फिर स्थान देव का पूजन करे 
*पूजन विधि* 
जिसका पूजन करना है उसका आवाहन करे दाये हाथ मे चावल पानी ले मंत्र बोले अहम् त्वाम ( श्री गुरूभ्यो ) आवाहनम् करिष्ये इहागच्छ तिष्ठ इदम आसनम समर्पियामि ( कोस्टक मे आप जिस गुरू या देव या देवी को बुलारहे हे उसका नाम ले ) चावल आसन या जमीन पर छोड दें हाथ से बैठने का इशारा करे

 2 फिर देवताओ के पैर धुलने के लिये एक चम्मच पानी कटोरी मे या किसी अन्य पात्र मे डालें और बोले हे महाराज मै आपके पैर धुल रहा हू 
फिर वस्त्र के रूप मे कलावा , मौली भेंट करें और बोले इदम् वस्त्रम् समर्पियामि फिर चन्दन दें इदम् चंदनम समर्पियामि 
फिर चावल दें इदम् अक्षतम् समर्पियामि 
फिर फूल या इत्र दे इदम् सुगन्धि समर्पियामि
 अगरबत्ती की तरफ हाथ से इशारे करे इदम् धूपम् घ्रहणयामि 
दीप दिखाये इदम् दीपम् दर्शयामि 
फिर मिठाई या बताशा दें इदम् नैवेध निवैदयामि
 जल दें इदम् जल समर्पियामि 
येसे ही सभी शक्तियों का क्रम से पूजन करते जाये गुरू गनेश इष्ट कुल देव पितर और स्थानदेव का करना है 
सुबह और शाम दोनो समय पंचोपचार पूजन करें 

 *पूजन विसर्जन विधि* 
अब आता है जब हमारी पूजा पूरी हो गयी है और देवो को विसर्जित करना है तो ये उसकी की विधि है 
हाथ मे थोड़े से चावल लेकर निम्न मंत्र बोलें 
*मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वर* 
*यत्पूजितं माया देवं परिपूर्ण तदस्तु मे* 
*आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम* 
*पूजनम न जानामि क्षमस्व परमेश्वर।।'* 
*निज मन्दिरम गछ गछ परमेश्वरा*
 *निज मन्दिरम गछ गछ परमेश्वरी*
 ये दो बार बोलना है फिर वो चावल जमीन पर डाल दें 
फिर खडे हो जाये
अपना आसन को फोल्ड कर दें 

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माला संस्कार करने की विधि / Mala Sanskar Ki Vidhi

माला संस्कार की विधि प्राण प्रतिष्ठा करने की विधि 

प्राण प्रतिष्ठा हमारे जीवन मे धर्म का महत्व है 
और धर्म मे अपने अपने धर्मो के हिसाब से देवी देवता है 
जिनकी पूजा की जाती है पूजा के लिये मूर्ति माला यंत्रो आदि की जरूरत होती है और इन सबको मूर्ति माला यंत्रो मे प्राण प्रतिष्ठा की जाती है 
 इस दुनिया मे सारी चीजे बेजान ,निर्जीव और मृत है 
यहॉ तक की हमारा शरीर भी मृत है लेकिन ये कार्य कर रहा है क्योकि इसमें प्राण ऊर्जा है जो चैतन्य ऊर्जा है 
केवल यही जाग्रत ,चैतन्य और जीवित है बाकी सब इसके कारण ही जिन्दा है चैतन है 
इसे हम प्राण ऊर्जा ,चैतन्य ऊर्जा ,चित शक्ति आदि नामो से जानते है जब हम प्राण प्रतिष्ठा करते है तो इसी ऊर्जा को हम उस वस्तु मे ट्रान्सफर करते है या डालते है और वो वस्तु मे चेतना आती है 
ये हमारे प्राण ऊर्जा के कारन होता है और वो वस्तु चैतन कहलाती है मूर्ति मे भी यही प्राण प्रतिष्ठा की जाती है और उसके पूजन पाठ से हमारी मनोकामना शीघ्र पूरी होती है 
यदि येसी प्राण प्रतिष्ठित माला से जाप किया जाता है तो फल कई गुना बढ जाता है 
येसे ही यंत्रो को यदि प्राण प्रतिष्ठित कर लिया जाता है तो उनका प्रभाव भी बहुत बढ जाता है 
 प्राण प्रतिष्ठित करने की विधि दे रहा हू इसके द्वारा आप किसी भी माला यंत्र मूर्ति आदि को चैतन्य कर सकते है यंत्र को , या माला को , या मूर्ति को जिसकी प्रतिष्ठा करनी हो उसे 
 पहले दूध गंगाजल सादे पानी से अच्छी तरह धो लेना चाहिये 
आप चाहे तो पंचगव्य से भी धो सकते है 
 उसके बाद उसे पोछकर साफ करके माला को दोनो हाथो मे पकडे , यंत्र कर रहे है तो यंत्र के मध्य भाग पर अगूंठा रखे और 
मूर्ती कर रहे है तो मूर्ति के सीने पर अपने दाये हाथ के अगूठे से टच करे और निम्न मंत्र का जाप करें मंत्र 
ॐ सुहंसाय विद्यमये प्राण प्राणाय धीमहि।
 तन्नो ज्योति निरंजनि प्रचोदयात ।।
 ज्योति निरंजनि के स्थान पर उस देवता का नाम लेना है 
जिसकी स्थापना कर रहे है 
 जैसे *ॐ सुहंसाय विद्यमये प्राण प्राणाये धीमहि तन्नो शिव प्रचोदयात* 
 जितना अधिक चैतन्य करना हो उतने मंत्र का जाप करते रहिये इसमे कोई संख्या निश्चित नही है आप 108 , 1008 , 10008 जितना चाहे उतना जाप कर सकते है 
पूरे जाप मे अगूठा वही टच रहेगा और भावना करनी है कि हमारे शरीर की प्राण ऊर्जा इस अगूठे द्वारा इस मे प्रवेश कर रही है 

तंत्र भाव प्रधान है ये याद रखे
श्रदा विश्वास से ही ये फलता फूलता है 
हमारे शास्त्रो मे भी इसके मंत्र दे रखे है आप उसके द्वारा भी प्राण प्रतिष्ठा कर सकते है 
 मंत्र 
ॐ मनोजुस्तिजुस्तमयजस्य बृहस्पति यज्ञ समिमं दधातु विस्वे देवा इहा माद्यंत्यामो प्रतिस्ठितः
 अस्यै प्राणः प्रतिष्ठन्तु अस्यै प्राणाक्षरन्तु च
अस्यै वैषत्वमर्चायै मामहेति च कश्चन 
इसी प्रकार मंत्र जाप कै समय मंत्र में ध्यान देकर मंत्र मे भी प्राण ऊर्जा डाली जाये तो मंत्र भी चैतन्य हो जाता है* 
 इस प्रकार से चैतन्य माला द्वारा जाप करने से चैतन्य मूर्ति का , चैतन्य यंत्र का पूजन करने पर चमत्कार बहुत जल्द होते है 
और मंत्र जल्दी फलित होता है ये मंत्र , मूर्ति , यंत्र , माला को प्राण प्रतिष्ठित करने की विधि दी गयी है 
ठीक से पढें और समझें और एक तात्रिक विधि भी होती है 
जिसमे गौ मूत्र से , रक्त से माला को संस्कार किया जाता है* 
जन सामान्य को वो विधि देना उचित नही है 
किसी भाई को यदि माला संस्कार गौ मूत्र से करवाना हो तो पर्सनल सम्पर्क करें आपको माला संस्कारित करके दे दी जायेगी गो मूत्र से संस्कार करने की दक्षिणा 1100/ 
रक्त से संस्कार करने की दक्षिणा 2100/ जिस किसी भाई को करवाना हो पर्सनल बता दें 

 हरेश तंत्र शक्ति साधना केन्द्र








मेरा अनुभव / Mera Anubhav

हरेश तंत्र शक्ति साधना केन्द्र

मेरा अनुभव 
एक दिन मै अपने गुरूदेव जी के शरण मे था 
और तंत्र पर चर्चा हो रही थी तो मेरे गुरूदेव ने मुझसे कहा कि हरीश भगवान बारह मिनट में आ सकते है
 तो मै चौंक गया बडा खुश होकर मेने पूछा केसे तो उन्होने कहा 
ये सीखने में बारह साल लग जाते है और 
उस दिन में तंत्र के बहुत बडे राज को समझ चुका था 
क्या आप समझे ? 
सच मैं भगवान तो बारह ही मिनट में आ जाते है 
 मगर हमें उने बुलाने में बारह साल लग जाती है 
 शक्तियॉ तो मिनटों में हाजिर हो जाये मगर हम अपनी योग्यता साबित ही नही कर पाते 
और कभी तंत्र को , कभी गुरू को , कभी शक्तियों को कोसने लगते हैं 
जबकि असली कमी हमारे अपने अन्दर होती है 
हम ना तो तंत्र सीखना चाहते है 
 ना तंत्र समझना चाहते है हम सीधा करना शुरू कर देते है 
नतीजा हमे कुछ नही मिलता हम लोग तंत्र में शरीर से काम लेते है जबकि तंत्र में सफलता मन से काम लेने में मिलती है
माला फेरत जग मुआ मिटा का मन का फेर । 
कर का मनका डाल दें मन का मनका फेर ।। 

तंत्र मे सफलता असफलता का सारा राज इनी चार लाइनों में छुपा है 
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जाप के प्रकार और साधना के परहेज / Jaap Ke Prkar Or Sadhna ke Parhej

हरेश तंत्र शक्ति साधना केन्द्र 

जाप के प्रकार और साधना के परहेज क्या है

 जाप तीन प्रकार का होता है 
1. मानसिक - जो केवल मन मे होता है जीभ भी स्थिर हो जाये 

2. उपांशु-  जो कि आपके अलावा कोई न सुन सके न समझ सके बुदबुदाना

3.बाचिक - जोर जोर से बोलना जिसे दूर बैठा सुन सके कथा वाचक की तरह 

केवल गुरुमंत्र आंखे बंद करके मानसिक होगा
बाकी सभी मंत्र जाप खुली आँखों से उपाशुं करने हैं 
लाइट बन्द रहेगी दीपक का प्रकाश पर्याप्त है 
ये नियम केवल साधना और कवच सिद्ध के समय रखने है गुरुमंत्र या नित्य पंचोपचार पूजन में नही 

साधना करते समय आपको ये चार नियमों का पालन करना है 

1* ब्रह्मचर्य का पालन करना है स्वप्नदोष से कोई दिक्कत नही है 
2* शराब या भांग या कोई भी ऐसा नशा जो आपके दिमाग को कंट्रोल करें व नहीं करना हैं 
3* अंडा ,मांस, मछली का प्रयोग नही करना है 
4* पूरे साधना काल मे उसी कमरे में जमीन पर बिस्तर लगाकर सोना हैं 

 *ये कुछ जरूरी वस्तुएं हैं जो प्रत्येक साधक के पास होनी आवश्यक हैं* 
 रुद्राक्ष माला, सफेटिक माला, काली हकीक माला, हरि तस्वी माला, 
गौ मुखी, आसन लाल , आसन के कपड़े, काले ,पिले, सफेद, हरे,  रोली ,कलावा, सुगंधित इत्र, अगरबत्ती या धूपबत्ती भोग में बतासे, मिश्री, या जो हो साधना में मिठाई