बुक की जानकारियॉ

 बुक की जानकारियाँ 


बेसिक बुक 450 रूपये की है 

अलौकिक शक्तियौ का परिचय बुक 520 रूपये की है

नोटो की बारिश बुक 550 रूपये की है

हरेश तंत्र साधनाये भाग 1  बुक 650 रूपये की है 


कोरियर चार्ज एक बुक मंगाने पर 100 रूपये 

दो बुक मंगाने 150 रूपये 

तीन बुक मंगाने पर  100 रूपये 

चारो बुक एक साथ मंगाने पर कोरियर सहित 2200 रूपये 


दुनिया मे ना इस तरह की बुक पढी होगी ना पढोगे  ऐसी ऐसी जानकारी जिसे जानकर आप बन सकते हो ज्ञानी विद्वान 


जल्दी आर्डर करें कहीं स्टॉक खतम ना हो जाये

जल्दी से जल्दी ऑर्डर करें कहीं स्टॉक खतम ना हो जाये 



सिद्ध तिथियॉ और रात्रियॉ

 आदेश


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तंत्र, मंत्र, देव, देवताओं की उपासना ओर साधना में सिद्धि प्राप्त करने के लिए कुछ उपयोगी सिद्ध तिथियां, रात्रियाँ और पर्व


कुछ तिथियां अपने आप में ही महत्वपूर्ण एवं सिद्धिप्रद मानी गई है, जिनका ज्ञान शायद ही इक्के दुक्के सन्यासी, साधु या ज्योतिषी को होगा । नीचे मैं इन्ही महत्वपूर्ण तिथियों को स्पष्ट कर रहा हूँ, जिसका प्रयोग करने से साधना में स्वतः सिद्धि प्राप्त होती हैं ।


दस महाविद्या प्रकोट्तस्व तिथियां


१- काली  भाद्रपद कृष्ण अष्टमी

२- तारा  चैत्र शुक्ल नवमी 

३- ललिता  माघ शुक्ल पूर्णिमा

४- भुवनेश्वरी  भाद्रपद शुक्ल द्वादशी 

५- भैरवी  मार्गशीर्ष शुक्ल पूर्णिमा

६- छिन्नमस्ता  वैशाख शुक्ल चतुर्दशी

७- धूमावती  ज्येष्ठ शुक्ल अष्टमी 

८- बगलामुखी  वैशाख शुक्ल चतुर्थी 

९- मातंगी  वैशाख शुक्ल चतुर्दशी

१०- कमला  कार्तिक कृष्ण अमावस्या


दस सिद्धविद्या प्रकोट्तस्व तिथियां


१- कुब्जिका  वैशाख कृष्ण त्रयोदशी की मध्य रात्रि को 

२- चण्डिका  वैशाख शुक्ल पूर्णिमा 

३- मात्रा  मार्गशीर्ष कृष्ण चतुर्दशी 

४- सिद्धलक्ष्मी  वैशाख शुक्ल चतुर्दशी

५- सरस्वती  माघ शुक्ल पंचमी

६- अन्नपूर्णा  मार्गशीर्ष कृष्ण चतुर्दशी 

७- गायत्री  श्रावण शुक्ल पूर्णिमा

८- पार्वती  आषाढ़ शुक्ल नवमी 

९- अपराजिता  आश्विन शुक्ल नवमी

१०- विन्ध्यवासिनी  भाद्रपद कृष्ण अष्टमी 


दशावतार जयन्ति तिथियां


१- मत्स्यावतार  कार्तिक शुक्ल नवमी

२- राम  चैत्र शुक्ल नवमी

३- कृष्ण  भाद्रपद कृष्ण अष्टमी

४- वामन  भाद्रपद शुक्ल द्वादशी

५- नृसिंह  वैशाख शुक्ल चतुर्दशी 

६- परशुराम  वैशाख शुक्ल तृतीया

७- वाराह  आश्विन शुक्ल चतुर्दशी

८- कल्कि  श्रावण शुक्ल षष्ठी

९- बुद्ध  भाद्रपद पूर्णिमा

१०- बलभद्र  मार्गशीर्ष शुक्ल पूर्णिमा 


युगारम्भ तिथियां


१- सतयुग  वैशाख शुक्ल तृतीया

२- त्रेतायुग  कार्तिक शुक्ल नवमी

३- द्वापरयुग  भाद्रपद कृष्ण त्रयोदशी

४- कलियुग  माघ कृष्ण अमावस्या


प्रत्येक महीने के गुरु पर्व


१- चैत्र शुक्ल तृतीया

२- वैशाख शुक्ल तृतीया

३- ज्येष्ठ शुक्ल दसमी

४- आषाढ़ शुक्ल पंचमी

५- श्रावण कृष्ण पंचमी

६- भाद्रपद शुक्ल त्रयोदशी

७- आश्विन कृष्ण त्रयोदशी

८- कार्तिक शुक्ल नवमी

९- मार्गशीर्ष शुक्ल तृतीया

१०- पोष शुक्ल नवमी

११- माघ शुक्ल चतुर्थी

१२- फाल्गुन शुक्ल नवमी


चार नवरात्र


१- चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नवमी 

२- आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा से नवमी (गुप्त)

३- आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से नवमी

४- माघ शुक्ल प्रतिपदा से नवमी (गुप्त)


विशिष्ट रात्रि पर्व


१- वीर रात्रि  चतुर्दशी को रविवार

२- महारात्रि  आश्विन शुक्ल अष्टमी

३- कालरात्रि  कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को अर्द्ध रात्रि में अमावस्या का योग होने पर 

४- मोह रात्रि  भाद्रपद कृष्ण अष्टमी

५- क्रोध रात्रि  चैत्र शुक्ल नवमी

६- घोर रात्रि  मार्गशीर्ष कृष्ण अष्टमी (महाकाल वीर जयन्ति) 

७- अचला रात्रि  फाल्गुन कृष्ण अष्टमी को मंगल या शुक्रवार हो 

८- तारा रात्रि  ज्येष्ठ शुक्ल दसमी

९- शिवरात्रि  फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी

१०- मृतसंजीवनी रात्रि  अमावस्या को शुक्रवार हो और मध्यान्ह में सूर्य ग्रहण हो

११- सिद्धि रात्रि  चैत्र मास की अष्टमी को रविवार और संक्रांति हो (काली और तारा के लिए विशेष सिद्धिप्रद)

१२- दारुण रात्रि  वैशाख शुक्ल तृतीया को मंगलवार हो

१३- सुंदरी रात्रि  किसी भी मास की पूर्णिमा को महानक्षत्र हो

१४- देवी रात्रि  किसी भी मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मंगलवार हो 

१५- गणेश रात्रि  माघ चतुर्थी को मकर संक्रांति हो

१६- सिद्धि रात्रि  किसी भी माह की कृष्ण पक्ष की नवमी को मूल नक्षत्र हो

१७- बाण रात्रि  किसी भी मास की कृष्ण पक्ष चतुर्थी को मंगलवार हो

१८-कृष्ण रात्रि  किसी भी अमावस्या को मंगलवार हो

१९- धर्म रात्रि  पौष या माघ अमावस्या को सूर्य श्रवण नक्षत्र पर हो

२०- दिव्य रात्रि  अमावस्या को मंगल या शुक्रवार और सूर्य क्रूर नक्षत्रो पर हो

२१- विष्णु रात्रि  भाद्रपद मास की अष्टमी को बुधवार हो

२२- काम संजीवनी रात्रि  माघ शुक्ल पंचमी (बसन्त पंचमी) को शुक्रवार हो

२३- रिद्धि सिद्धि योग रात्रि  चैत्र मास की तृतीया को रेवती नक्षत्र हो

२४- पर्वराज रात्रि  पौष मास की तृतीया को शुक्रवार तथा रेवती नक्षत्र हो ।


चार महारात्रि 


१. मोहरात्रि (जन्माष्टमी) । 

२. कालरात्रि (नरक चतुर्दशी) ।

३. दारुण रात्रि (होली) । 

४. अहोरात्रि (महाशिवरात्रि)



*सात दिवसीय शिविर की रूप रेखा* 

ध्यान योग शिविर की रूपरेखा


*पहला दिन दूसरा दिन तीसरे  दिन  की रूप रेखा*


सुबह 5 बजे आपको जाकर नहाधोकर तैयार होना है 

सुबह 6  बजे से 9बजे  तक ध्यान करेगे 

  9 बजे  से 10 बजे तक नाश्ते का समय  रहेगा 

10 बजे से 12 तक  योग निद्रा का समय रहेगा  

 12 बजे  से 1 बजे तक त्राटक करेगे 

1 बजे से 2 बजे तक खाना रहेगा 

2 बजे से 3 बजे तक आराम करने का समय रहेगा 


3 बजे से 5 बजे तक तंत्र चर्चा का समय रहेगा  

आधा घन्टा रेस्ट रहेगा 

5.30 से 8 बजे तक  ध्यान का समय रहेगा  

8 बजे से रात्रि का खाना 9 बजे तक 

 9 बजे से दस बजे तक आज्ञा चक्र जागरण क्रिया  

10 बजे से सुबह 5  बजे तक सोने का समय रहेगा  


ये पहले दूसरे तीसरे  दिन की रूप रेखा है 



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हरेश तंत्र शक्ति साधना शिविर 


*सात दिवसीय शिविर की रूप रेखा* 


*चौथा दिन* 

सुबह 5 बजे आपको जाकर नहाधोकर तैयार होना है 

सुबह 6  बजे से 9बजे  तक ध्यान करेगे 

  9 बजे  से 10 बजे तक नाश्ते का समय  रहेगा 

*10 बजे से 1 बजे तक बेसिक करवाया जायेगा*

1 बजे से 2 बजे तक खाना रहेगा 

2 बजे से 3 बजे तक आराम करने का समय रहेगा 


3 बजे से 5 बजे तक तंत्र चर्चा का समय रहेगा  

आधा घन्टा रेस्ट रहेगा 

5.30 से 8 बजे तक  ध्यान का समय रहेगा  

8 बजे से रात्रि का खाना 9 बजे तक 

 9 बजे से दस बजे आज्ञा चक्र जागरण क्रिया 

10 बजे से सुबह 5  बजे तक सोने का समय रहेगा  


ये चौथे दिन की रूप रेखा है

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*पॉचवा  दिन* 

सुबह 5 बजे आपको जाकर नहाधोकर तैयार होना है 

सुबह 6  बजे से 9बजे  तक ध्यान करेगे 

  9 बजे  से 10 बजे तक नाश्ते का समय  रहेगा 

10 बजे से 12 बजे तक योग निद्रा का समय रहेगा 

12 बजे से  एक बजे तक त्राटक करवाया जायेगा 

1 बजे से 2 बजे तक खाना रहेगा 

2 बजे से 3 बजे तक आराम करने का समय रहेगा 


3 बजे से 5 बजे तक तंत्र चर्चा का समय रहेगा  

आधा घन्टा रेस्ट रहेगा 

5.30 से 8 बजे तक  ध्यान का समय रहेगा  

8 बजे से रात्रि का खाना 9 बजे तक 

 9 बजे से दस बजे तक रेस्ट रहेगा 

*10 बजे से 1 बजे तक साधना करवायी जायेगी अप्सरा या यक्षणी की*


साधना समाप्ति के बाद सुबह  5  बजे तक सोने का समय रहेगा  


ये पॉचवे  दिन की रूप रेखा है

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*छटवा  दिन* 

सुबह 5 बजे आपको जाकर नहाधोकर तैयार होना है 

सुबह 6  बजे से 9बजे  तक ध्यान करेगे 

  9 बजे  से 10 बजे तक नाश्ते का समय  रहेगा 

10 बजे से 12 बजे तक योग निद्रा का समय रहेगा 

12 बजे से  एक बजे तक त्राटक करवाया जायेगा 

1 बजे से 2 बजे तक खाना रहेगा 

2 बजे से 3 बजे तक आराम करने का समय रहेगा 


3 बजे से 5 बजे तक तंत्र चर्चा का समय रहेगा  

आधा घन्टा रेस्ट रहेगा 

5.30 से 8 बजे तक  ध्यान का समय रहेगा  

8 बजे से रात्रि का खाना 9 बजे तक 

 9 बजे से दस बजे तक रेस्ट रहेगा 

*10 बजे से 1 बजे तक साधना करवायी जायेगी प्रेत या अन्य कोई तामसिक शक्ति की*


साधना समाप्ति के बाद सुबह  5  बजे तक सोने का समय रहेगा  


ये छटवे दिन   दिन की रूप रेखा है

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*सातवा दिन* 


सुबह 5 बजे आपको जाकर नहाधोकर तैयार होना है 

सुबह 6  बजे से 9बजे  तक ध्यान करेगे 

  9 बजे  से 10 बजे तक नाश्ते का समय  रहेगा 

*10 बजे से 1 बजे तक हवन और ज्योत करवाया जायेगा*

1 बजे से 2 बजे तक खाना रहेगा 

2 बजे से 3 बजे तक आराम करने का समय रहेगा 


3 बजे से 5 बजे तक तंत्र चर्चा का समय रहेगा  

आधा घन्टा रेस्ट रहेगा 

5.30 से 8 बजे तक  ध्यान का समय रहेगा  

8 बजे से रात्रि का खाना 9 बजे तक 

 9 बजे से दस बजे तक रेस्ट रहेगा 

*10 बजे से 1 बजे तक पिछले दिन वाली साधना ही  करवायी जायेगी*


साधना समाप्ति के बाद सुबह  आप कभी भी जाग सकते हो  


ये सातवा  दिन   दिन की रूप रेखा है

आठवे दिन आप लोग अपने घर जा सकते हो।।


*सात दिवसीय ध्यान योग साधना शिविर* 



*ये शिविर आने वाली मार्च माह के 13 तारीख से 19 मार्च  तक सात  दिवसीय रहेगा*  इस शिविर मे ध्यान , योग , साधना , त्राटक ,  योग निद्रा ,  कुंडलिनी , हवन , ज्योत , आदि होगें एवम इन सभी विषयो पर चर्चा होगी कई साधक की इच्छा होती है कि गुरू के साथ बैठकर , साथ रहकर कुछ ज्ञान प्राप्त किया जाये गुरू के सानिध्य मे कुछ किया जाया  कुछ सीखा जाये   इस शिविर को इसी उद्देश्य के कारण रखा जा रहा है *सबसे जरूरी बात  इस सात दिवसीय शिविर को पैसा कमाने के उद्देश्य से नही रखा जा रहा इसलिए इस सात दिवसीय शिविर का मात्र सात हजार रूपये का खर्चा रखा गया है* जो आपके यहॉ रहने खाने पीने एवम सामग्री वगेरह पर खर्च होगा सातो दिन मे  स्वयं आपके साथ रहूगॉ  और साथ रहकर ही समस्त क्रियाये करूगॉ 

इस शिविर मे जितने हो सके साधक आये और सीखने समझने जानने का ये मौका गवाये नही इन सात दिनो मे आपको यहॉ बहुत कुछ जानने सीखने समझने देखने को मिलेगा जो आपके काम आयेगा  जो भी साधक इस शिविर मे भाग लेना चाहते है वो इस नम्बर पर पेमेंट‌ जमा करवा कर रसीद भेजे और अपनी सीटे सुरक्षित करें 


हरेश तंत्र शक्ति साधना केन्द्र



एच डी एफ सी बैंक 

एकाउन्ट डिटेल 




nam - haresh kumar 


ac - 50200043273526


ifc cod -  hdfc0009096


गूगल पे ---  9690988493


फोन पे ----  9690988493

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अलौकिक शक्तियो का परिचय

 हमारे केन्द्र द्वारा पहले एक बेसिक बुक लिखी गयी है जिसमे पूजन के साधना के सभी नियम कानून एवम् विधि विधान दिये गये इस दूसरी बुक *अलौकिक शक्तियो का परिचय* मे  85 प्रकार के  भूत प्रेत जिन्न जिन्नात यक्ष परी देवी देवताओ का पूर्ण परिचय दिया गया है साथ मे इनके लक्षण भी दिये गये है आप लोग पढकर लाभ उठाये इस बुक को पढने के बाद आप लोग अच्छी तरह से इलाज करना सीख जायेगे   दोनो बुक  मंगाने के लिये केन्द्र के नम्बर पर सम्पर्क कर सकते है 9690988493 पर 

हरेश तंत्र बेसिक बुक

 हरेश तंत्र शक्ति साधना केन्द्र 



*हरेश बेसिक तंत्र ज्ञान बुक*


*बुक प्राइस 450₹ मात्र*

 सौ रूपये कोरियर चार्ज अलग

किसी भी कार्य को सीखने के लिये सबसे पहले उसकी बेसिक जानकारी होना बहुत होता है 

येसे ही तंत्र सीखने से पहले तंत्र की बेसिक जानकारी होना बहुत जरूरी है ताकि आप लोग वक्त पडने पर सही फैसले ले सके 

बिना बेसिक के लोगो की साधना सफल नही होती इसलिये आपके अपने जाने पहचाने  तांत्रिक हरेश कुमार गुरूजी ने अपने अनुभव और अपने ज्ञान से  *हरेश बेसिक तंत्र ज्ञान* नाम की    पुस्तक को लिखा गया है जिसमे साधक को कब , क्या , केसे करना चाहिये वो सभी विस्तार से दिया गया है हमारे द्वारा जो बेसिक करवाया जाता है उसका पूरा ज्ञान इस पुस्तक मे दिया गया है 

येसे साधक जिनके पास टच मोबाइल नही है , येसे साधक जो लिंक वगेरह नही खोल सकते उनके लिये ये पुस्तक किसी वरदान से कम नही है 

आप सभी इस पुस्तक मंगाये और पढें इसमे दी गयी सभी जानकारी आपके जीवन काम आयेगी और आपको साधनाओ मे सफलता दिलवायेगी  *इस पुस्तक मे *पूरी बेसिक जानकारी , सभी कवच कीलन मंत्र , सभी नियमो को विस्तार से बताया गया है*


इस पुस्तक का *मूल्य मात्र तीन सौ  450₹ रूपये* लिया जा रहा है  जिस किसी भाई को ये पुस्तक मंगानी हो वो तीन सौ रूपये जमा करके पूरा पता पिन कोड , फोन नम्बर सहित देकर ये पुस्तक मंगवा सकते है इस पुस्तक मे येसी बहुत सी जानकारी है जो आपकी साधना को पूरी तरह से सफलता के शिखर पर पहुचा देगी 



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*बुक के साथ कोरियर चार्ज सौ रूपये अलग से भेजे*

*टोटल 550 रूपये*

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*और ये पुस्तक आप किसी और दूसरे व्यक्ति को पढने के लिये दे सकते हो , चाहे वो कोई भी हो  अपने दोस्त , मित्र , रिश्तेदार ,अन्य कोई साधक हो सभी को आप ये पुस्तक पढने दे सकते हो*


पेमेंट नीचे दिये खाते मे करके रसीद या स्क्रीन सॉट भेजकर पुस्तक मंगवा सकते है 

हरेश तंत्र शक्ति साधना केन्द्

एच डी एफ सी बैंक 

एकाउन्ट डिटेल

nam - haresh kumar 

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पूजनकी विधि संस्कृत में* आज मे आपको प्राथमिक पूजन की विधी बता रहा हू कुछ भाई पूजन विधि जाने बिना ही साधना करते है नतीजा साधना सफल नही होती विधि १ सबसे पहले नहा धोकर साफ कपडे पहने फिर आसन पर ये मंत्र एक बार पढकर बैठे *मन मार मैदान करू करू मे चकना चूर पॉच महेश्वर आज्ञा करो तो बैठू आसन पूर* २ बैठने के बाद पवित्री करण करे इस मंत्र से 👇 बाये हाथ मे जल ले उसमे दाये हाथ की पाचो उगली डालकर मंत्र बोले *ॐ अपवित्र पवित्रो वा सर्वेस्थाम गतोअपि स्मेरेत पुडिरीकाक्षः सः बाह्म्भयंतर शुचि ॐपुनात पुडंरीकाक्षाय ॐपुनात पुडंरी काक्षाय ॐपुनात पू* फिर पानी को सर पर , पूजन सामग्री पर छिडक दें ३ फिर आचमन करो तीन बार मंत्र बोले ॐकेशवाय नमः ॐमाधवाय नमः ॐ नारायणाय नमः मंत्र बोलकर दाये अगूठे से दो बार होठ पोछकर हाथ धोले ४ फिर प्राणायाम करे तीन बार एक नथुने से सॉस ले थोडी देर रोके और दूसरे से निकाल दे फिर जिससे सॉस निकाली है उससे सॉस ले थोडी देर रोके दूसरे नथुने से निकाल दें ५ फिर दीपक निम्न मंत्र बोलकर जलाये *ॐ ज्योत ज्योत महा ज्योत सकल ज्योत जगाये तुमको पूजे सकल संसार ज्योत माता तू ईश्वरी तू हमारी धरम की माता हम तेरे धरम के पूत* *ॐ ज्योति पुरूषाय धीमहि तन्नो ज्योत निरंजन प्रचोदयात* ६ फिर दो अगर बत्ती लगाये ७ फिर गुरूजी का पूजन करे ८ फिर गणेश जी का पूजन करे ९फिर इष्ट देव का पूजन करे १०फिर कुल देव का पूजन करे ११ फिर पितरो का पूजन करें १२ फिर स्थान देव का पूजन करे *पूजन विधि* जिसका पूजन करना है उसका आवाहन करे दाये हाथ मे चावल पानी ले मंत्र बोले अहम् त्वाम ( श्री गुरूभ्यो ) आवाहनम् करिष्ये इहागच्छ तिष्ठ इदम आसनम समर्पियामि ( कोस्टक मे आप जिस गुरू या देव या देवी को बुलारहे हे उसका नाम ले ) चावल आसन या जमीन पर छोड दें हाथ से बैठने का इशारा करे 2 फिर देवताओ के पैर धुलने के लिये एक चम्मच पानी कटोरी मे या किसी अन्य पात्र मे डालें और बोले हे महाराज मै आपके पैर धुल रहा हू फिर वस्त्र के रूप मे कलावा , मौली भेंट करें और बोले इदम् वस्त्रम् समर्पियामि फिर चन्दन दें इदम् चंदनम समर्पियामि फिर चावल दें इदम् अक्षतम् समर्पियामि फिर फूल या इत्र दे इदम् सुगन्धि समर्पियामि अगरबत्ती की तरफ हाथ से इशारे करे इदम् धूपम् घ्रहणयामि दीप दिखाये इदम् दीपम् दर्शयामि फिर मिठाई या बताशा दें इदम् नैवेध निवैदयामि जल दें इदम् जल समर्पियामि येसे ही सभी शक्तियों का क्रम से पूजन करते जाये गुरू गनेश इष्ट कुल देव पितर और स्थानदेव का करना है सुबह और शाम *पूजन विसर्जन विधि* अब आता है जब हमारी पूजा पूरी हो गयी है और देवो को विसर्जित करना है तो ये उसकी की विधि है हाथ मे थोड़े से चावल लेकर निम्न मंत्र बोलें *मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वर* *यत्पूजितं माया देवं परिपूर्ण तदस्तु मे* *आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम* *पूजनम न जानामि क्षमस्व परमेश्वर।।'* *निज मन्दिरम गछ गछ परमेश्वरा* *निज मन्दिरम गछ गछ परमेश्वरी* ये दो बार बोलना है फिर वो चावल जमीन पर डाल दें फिर खडे हो जाये at March 17, 2018 Email This BlogThis! Share to Twitter Share to Facebook Share to Pinterest No comments: Post a comment

  पूजन की विधि 


संस्कृत मे हरेश तंत्र शक्ति साधना केन्द्र *पूजन की विधि संस्कृत में* आज मे आपको प्राथमिक पूजन की विधी बता रहा हू कुछ भाई पूजन विधि जाने बिना ही साधना करते है नतीजा साधना सफल नही होती विधि १ सबसे पहले नहा धोकर साफ कपडे पहने फिर आसन पर ये मंत्र एक बार पढकर बैठे *मन मार मैदान करू करू मे चकना चूर पॉच महेश्वर आज्ञा करो तो बैठू आसन पूर* २ बैठने के बाद पवित्री करण करे इस मंत्र से 👇 बाये हाथ मे जल ले उसमे दाये हाथ की पाचो उगली डालकर मंत्र बोले *ॐ अपवित्र पवित्रो वा सर्वेस्थाम गतोअपि स्मेरेत पुडिरीकाक्षः सः बाह्म्भयंतर शुचि ॐपुनात पुडंरीकाक्षाय ॐपुनात पुडंरी काक्षाय ॐपुनात पू* फिर पानी को सर पर , पूजन सामग्री पर छिडक दें ३ फिर आचमन करो तीन बार मंत्र बोले ॐकेशवाय नमः ॐमाधवाय नमः ॐ नारायणाय नमः मंत्र बोलकर दाये अगूठे से दो बार होठ पोछकर हाथ धोले ४ फिर प्राणायाम करे तीन बार एक नथुने से सॉस ले थोडी देर रोके और दूसरे से निकाल दे फिर जिससे सॉस निकाली है उससे सॉस ले थोडी देर रोके दूसरे नथुने से निकाल दें ५ फिर दीपक निम्न मंत्र बोलकर जलाये *ॐ ज्योत ज्योत महा ज्योत सकल ज्योत जगाये तुमको पूजे सकल संसार ज्योत माता तू ईश्वरी तू हमारी धरम की माता हम तेरे धरम के पूत* *ॐ ज्योति पुरूषाय धीमहि तन्नो ज्योत निरंजन प्रचोदयात* ६ फिर दो अगर बत्ती लगाये ७ फिर गुरूजी का पूजन करे ८ फिर गणेश जी का पूजन करे ९फिर इष्ट देव का पूजन करे १०फिर कुल देव का पूजन करे ११ फिर पितरो का पूजन करें १२ फिर स्थान देव का पूजन करे *पूजन विधि* जिसका पूजन करना है उसका आवाहन करे दाये हाथ मे चावल पानी ले मंत्र बोले अहम् त्वाम ( श्री गुरूभ्यो ) आवाहनम् करिष्ये इहागच्छ तिष्ठ इदम आसनम समर्पियामि ( कोस्टक मे आप जिस गुरू या देव या देवी को बुलारहे हे उसका नाम ले ) चावल आसन या जमीन पर छोड दें हाथ से बैठने का इशारा करे 2 फिर देवताओ के पैर धुलने के लिये एक चम्मच पानी कटोरी मे या किसी अन्य पात्र मे डालें और बोले हे महाराज मै आपके पैर धुल रहा हू फिर वस्त्र के रूप मे कलावा , मौली भेंट करें और बोले इदम् वस्त्रम् समर्पियामि फिर चन्दन दें इदम् चंदनम समर्पियामि फिर चावल दें इदम् अक्षतम् समर्पियामि फिर फूल या इत्र दे इदम् सुगन्धि समर्पियामि अगरबत्ती की तरफ हाथ से इशारे करे इदम् धूपम् घ्रहणयामि दीप दिखाये इदम् दीपम् दर्शयामि फिर मिठाई या बताशा दें इदम् नैवेध निवैदयामि जल दें इदम् जल समर्पियामि येसे ही सभी शक्तियों का क्रम से पूजन करते जाये गुरू गनेश इष्ट कुल देव पितर और स्थानदेव का करना है सुबह और शाम *पूजन विसर्जन विधि* अब आता है जब हमारी पूजा पूरी हो गयी है और देवो को विसर्जित करना है तो ये उसकी की विधि है हाथ मे थोड़े से चावल लेकर निम्न मंत्र बोलें *मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वर* *यत्पूजितं माया देवं परिपूर्ण तदस्तु मे* *आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम* *पूजनम न जानामि क्षमस्व परमेश्वर।।'* *निज मन्दिरम गछ गछ परमेश्वरा* *निज मन्दिरम गछ गछ परमेश्वरी* ये दो बार बोलना है फिर वो चावल जमीन पर डाल दें फिर खडे हो जाये at March 17, 2018    Email This BlogThis! Share to Twitter Share to Facebook Share to Pinterest No comments: Post a comment

दिसम्बर पैड ग्रुप

 हरेश  तंत्र शक्ति साधना केन्द्र


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*दिसम्बर  पैड ग्रुप*


हर माह की तरह इस माह दिसम्बर   मे कुछ विशेष साधना इस ग्रुप में सिखाई और बतायी जायेगी


*इस पैड ग्रुप का शुल्क मात्र 750/ रूपये रखा गया है* 


इस ग्रुप मे निम्न साधनाये  आपको मिलेगीं


*साधना*

१.हर तरह की बीमारी ठीक करने के लिये *शिव रोग नाशक साधना*


२. *काली का एक दिव्य मंत्र* जिससे होते है कई दिव्य काम 


३. त्रिदेवोका रूप  *दत्तात्रेय साधना* हर मनोकामना की पूर्ति के लिये


४. *किसी भी तरह का बंधन खोलने और बंधन लगाने का एक ही मंत्र* टू इन वन


५. *एक शमशानी  बेनामी शक्ति जो करती है केवल भोग पर कार्य* 


*सूर्य ग्रहण विशेष*


चार तारीख अमावस्या को सूर्य ग्रहण है 

इस ग्रहण मे करें 

*रत्नाकर योगिनी साधना*



✋🏻 *दिसम्बर  ग्रुप की शान* ✋ 


*एकअचूक मारण क्रिया जिससे किसी भी शत्रु का बचना है नाममुकिन*



ये सब आपको दिसम्बर माह के पैड ग्रुप मे मिलेगा इसका *शुल्क मात्र 750/रूपये* रखा गया है 



जिसे आपको निम्न एकाउंट मे जमा करना है 

जमा करके उसकी रसीद , स्क्रीनसॉट,गुरूजी के पर्सनल नम्बर पर या  हमें निम्न नम्बरों पर व्हाट्सएप करे


हरेश तंत्र शक्ति साधना केन्द्र


*HDFC BANK MATHURA BRANCH*

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गुरू मंत्र माला से करने का नियम / Guru mantra Mala Se karne ke Niyam


गुरू मंत्र माला से करने का नियम


मे जो गुरू मंत्र आपको देता हू उसका आपको मानसिक जाप करना है 

दो घन्टे के लिये बाकी बाईस घन्टे चलते फिरते खाते पीते जाप करते रहें 

किसी कारण से यदि मानसिक जाप करने मे दिक्कत आ रही हो 

तो आप लोग माला लेकर जाप कर सकते है 

माला से जाप करने पर पूरे नियम का पालन करना होगा 


नियम नीचे दे रहा हू 

१. गुरू मंत्र का कम से कम नित्य का ग्यारह हजार का जाप करना अनिवार्य है अधिक कर लें तो क्या कहने 

२. जाप उपाशु करना है यानि बुदबुदाकर 

३. माला 

शिव , भैरव , काली , के इस्ट होने पर रूद्राक्ष की माला से जाप करें 

कृष्ण , का जाप वैजयन्ती , रूद्राक्ष  से

राम हनुमान का तुलसी से 

हनुमान का मूगें ,तुलसी , रूद्राक्ष से 

मुस्लिम मे तसबी या हकीक से 

दुर्गा का जाप लाल मूँगा या रूद्राक्ष से 

बगलामुखी का हल्दी की माला या रूद्राक्ष से 

विषेश माला ना मिलें तो 

सभी का जाप रूद्राक्ष की माला से आप लोग कर सकते है 


४. दिशा 

धन चाहने वालो को पश्चिम मुख होकर जाप करना चाहिये 

शक्ति चाहने वालो को उत्तर मुख होकर जाप करना चाहिये 

ज्ञान चाहने वालो को पूरब मुख होकर जाप करना चाहिये 

शत्रु नाश या शत्रु से छुटकारा पाने के लिये दक्षिण मुख होकर जाप करना चाहिये 


५.  जाप का याद रखें ग्यारह हजार से कम ना हों 

६. कही बाहर जाने पर 

यदि दो चार दिन पूजन नही करोगे तो 

कोई दिक्कत नही होती 

निसंकोच  बाहर जा सकते हो 

७. उपाशु जाप हमेशा ही एकान्त मे करें ताकि मंत्र गुप्त रह सकें 

८. गुरू मंत्र के लिये किसी अन्य नियम के पालन की आवश्यकता नही है 

जैसे ब्रह्मचर्य , जमीन पर सोना , मॉस वगैरह खाना पीना 

ये सब खा पी सकते हो बस उस दिन जाप मत करना 

९. जाप संकल्प लेकर करें तो अधिक त्वरित परिणाम प्राप्त होता है 

 जाप के बाद जाप इस्ट को समर्पित कर दें 

१०.  जिन लोगो को मुक्ति प्राप्त करनी है मोक्ष पाना है वो गुरू मंत्र का मानसिक जाप ही करें माला से नही करें 

११. माला से वही लोग जाप करें जिने  मुक्ति से कोई लेना देना नही है

१२.  मानसिक जाप का फल अधिक मिलता है 

उपाशु का कम 


तो ये थे सामान्य नियम जिनका पालन करके आप अपने गुरू मंत्र से मन चाहा कार्य ले सकते है और अपनी मनोकामना पूरी कर सकते है 


अधिक जानकारी के लिये सम्पर्क करें 

हरेश तंत्र शक्ति साधना केन्द्र 

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उतारा जो करे किये कराए को नष्ट करें ( पर्व विशेष )/ Utaara Kare kiye Karaye Ko Nast

हरेश तंत्र शक्ति साधना केन्द्र

होली विशेष

सभी लोग आज ज्योत अवश्य करें 

अपने सभी मंत्रो को जाग्रत करें 

सभी शक्तियों को भोग दें 

अपने परिवार के सभी सदस्यो को बिठाकर उनके सर से इक्कीस बार निम्न सामग्री का उतारा ( उसार लें )कर लें

इससे नजर , गुजर , हल्की फुल्की दिक्कत , किया कराया खतम हो जाता है ये क्रिया आप होली दिवाली की रात को अवश्य किया करें

इससे परिवार मे खुशहाली आती है प्रेम बडता है 

घर की निगेटविटी खतम होती है

सामग्री

इक्कीस लौंग 

पॉच बताशे 

एक बूंदी का लड्डू 

या मिठाई एक पीस 

एक नीबूं 

ग्यारह काली मिर्च के दाने 

पॉच साबुत लाल मिर्च 

एक कपूर की टिक्की  


ये सब सामग्री लेकर अपने परिवार के सिर से ऊसार कर किसी एकान्त जगह पर रख आये 

कहीं भी रख आये घर से बाहर 

नोट - किसी को यदि कुछ ज्यादा परेशानी हो तो साथ मे एक जायफल भी रख लें

उतारा अपने कुल देव या इस्ट के नाम से करें 

सामग्री सरल है घर पर ही मिल जायेगी 

इसमे दिशा का कपडे का और केसा भी कोई बन्धन नही है 

पूजन की विधि संस्कृत में/ Pujan ki Vidhi Sanskrit Main

  

हरेश तंत्र शक्ति साधना केन्द्र 

पूजन की विधि संस्कृत में

आज मे आपको प्राथमिक पूजन की विधी बता रहा हू 
कुछ भाई पूजन विधि जाने बिना ही साधना करते है 
नतीजा साधना सफल नही होती 

विधि 
१ सबसे पहले नहा धोकर साफ कपडे पहने फिर आसन पर ये मंत्र एक बार पढकर बैठे 
मन मार मैदान करू करू मे चकना चूर ।
पॉच महेश्वर आज्ञा करो तो बैठू आसन पूर ।।

२ बैठने के बाद पवित्री करण करे इस मंत्र से 👇 बाये हाथ मे जल ले उसमे दाये हाथ की पाचो उगली डालकर मंत्र बोले 
ॐ अपवित्र पवित्रो वा सर्वेस्थाम गतोअपि ।
स्मेरेत पुडिरीकाक्षः सः बाह्म्भयंतर शुचि ।
ॐ पुनात पुडंरीकाक्षाय ॐ पुनात पुडंरी काक्षाय ॐ पुनात पू ।।
फिर पानी को सर पर , पूजन सामग्री पर छिडक दें 

३ फिर आचमन करो तीन बार मंत्र बोले 
ॐकेशवाय नमः ॐमाधवाय नमः ॐ नारायणाय नमः
मंत्र बोलकर दाये अगूठे से दो बार होठ पोछकर हाथ धोले

 ४ फिर प्राणायाम करे तीन बार एक नथुने से सॉस ले थोडी देर रोके और दूसरे से निकाल दे फिर जिससे सॉस निकाली है 
उससे सॉस ले थोडी देर रोके दूसरे नथुने से निकाल दें 

५ फिर दीपक निम्न मंत्र बोलकर जलाये 
ॐ ज्योत ज्योत महा ज्योत सकल ज्योत जगाये 
तुमको पूजे सकल संसार ज्योत माता तू ईश्वरी 
तू हमारी धरम की माता हम तेरे धरम के पूत 
ॐ ज्योति पुरूषाय धीमहि तन्नो ज्योत निरंजन प्रचोदयात

६  फिर दो अगर बत्ती लगाये
 ७  फिर गुरूजी का पूजन करे 
८  फिर गणेश जी का पूजन करे 
९  फिर इष्ट देव का पूजन करे 
१० फिर कुल देव का पूजन करे 
११ फिर पितरो का पूजन करें
१२ फिर स्थान देव का पूजन करे 

*पूजन विधि* 

जिसका पूजन करना है उसका आवाहन करे दाये हाथ मे चावल पानी ले मंत्र बोले 
*अहम् त्वाम ( श्री गुरूभ्यो ) आवाहनम् करिष्ये इहागच्छ तिष्ठ इदम आसनम समर्पियामि* 
( कोस्टक मे आप जिस गुरू या देव या देवी को बुलारहे हे उसका नाम ले ) चावल आसन या जमीन पर छोड दें हाथ से बैठने का इशारा करे
 2 फिर देवताओ के पैर धुलने के लिये एक चम्मच पानी कटोरी मे या किसी अन्य पात्र मे डालें और बोले हे महाराज मै आपके पैर धुल रहा हू 

फिर वस्त्र के रूप मे कलावा , मौली भेंट करें और बोले 
इदम् वस्त्रम् समर्पियामि
 
फिर चन्दन दें *इदम् चंदनम समर्पियामि*

फिर चावल दें *इदम् अक्षतम् समर्पियामि*

फिर फूल या इत्र दे *इदम् सुगन्धि समर्पियामि*

अगरबत्ती की तरफ हाथ से इशारे करे बोले *इदम् धूपम् घ्रहणयामि*

फिर दीप दिखाये *इदम् दीपम् दर्शयामि*

फिर मिठाई या बताशा दें  बोले *इदम् नैवेध निवैदयामि* 

जल दें *इदम् जल समर्पियामि*

 येसे ही सभी शक्तियों का क्रम से पूजन करते जाये गुरू गनेश इष्ट कुल देव पितर और स्थानदेव कापूजन रोज करना है  सुबह और शाम 

*पूजन विसर्जन विधि* 

अब आता है जब हमारी पूजा पूरी हो गयी है और देवो को विसर्जित करना है तो ये उसकी की विधि है हाथ मे थोड़े से चावल लेकर

 निम्न मंत्र बोलें 
मंत्र हीनं  क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वर ।
 यत्पूजितं माया देवं परिपूर्ण तदस्तु मे ।।
 आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम ।
 पूजनम न जानामि क्षमस्व परमेश्वर।। 
निज मन्दिरम गछ गछ परमेश्वरा ।
निज मन्दिरम गछ गछ परमेश्वरी ।।

ये दो बार बोलना है फिर वो चावल जमीन पर डाल दें फिर खडे हो
 जाये